नई दिल्ली: राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के खंडार उपखंड के छोटे से गांव बहरावंडा खुर्द में बुधवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना हुई. यहां 36 साल के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हरिओम बैरवा घर में अचानक गिर पड़े. चंद मिनटों में ही अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उनकी सांसें थम चुकी थीं.डॉक्टरों ने मौत का कारण मासिव हार्ट अटैक बताया.
उधर हरिओम के परिवार वाले कुछ और ही कहानी सुना रहे हैं. पिता बृजमोहन बैरवा की आंखें अभी भी नम हैं. वे बताते हैं, ''पिछले दस-पंद्रह दिन से हरिओम दिन-रात मतदाता लिस्ट के रिवीजन में जुटा था. SIR का काम था. ऊपर से एसडीएम साहब और तहसीलदार साहब का लगातार फोन आ रहा था, 'जल्दी करो, जल्दी करो, टारगेट पूरा करो'. वो घर आता तो चुपचाप कोने में बैठ जाता, किसी से बात नहीं करता. हम समझते थे थकान है, पर अंदर से टूट रहा था.''
बुधवार की उस आखिरी कॉल का जिक्र करते ही मां का गला रुंध जाता है. मां कहती हैं, ''तहसीलदार साहब का फोन आया था. हरिओम ने फोन कान पर लगाया, 'जी सर… जी सर…' बस इतना ही कहा और फोन काटा. पांच मिनट बाद वो चाय का कप हाथ में लिए खड़ा था, अचानक कप गिरा और वो जमीन पर. हम दौड़े, सीने पर हाथ रखा तो धड़कन बंद थी.''
परिजनों का साफ आरोप है कि लगातार मानसिक तनाव और दबाव ने हरिओम की जान ले ली. वे अधिकारीयों के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं. दूसरी तरफ तहसीलदार जयप्रकाश रोलन ने सारे आरोप खारिज कर दिए. उनका कहना है, ''हम तो सिर्फ ऊपर के आदेश आगे बता रहे थे. कोई व्यक्तिगत दबाव नहीं था. हरिओम बहुत अच्छा और ईमानदार कर्मचारी था. उसकी मौत बहुत दुखद है.'' उधर पूरे गांव में मातम भी है और गुस्सा भी है.
लोग फुसफुसा रहे हैं, ''कागजों का टारगेट पूरा करने के चक्कर में एक जवान की जान चली गई.'' परिजन पुलिस चौकी से थाने का चक्कर काट रहे हैं. अभी FIR भी दर्ज नहीं हुई है. बस इतना पता है कि एक 36 साल का जवान, जिसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, आज घर नहीं लौटेगा. और एक फोन, जो सिर्फ पांच मिनट पहले आया था, अब हमेशा के लिए खामोश हो चुका है.