Trinamool Councilor Mahesh Kumar Sharma: कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं की गिरफ्तारियों की नई लहर देखी जा रही है. कई पार्षदों और एक पार्टी प्रवक्ता को एक्सटॉर्शन, धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और संपत्ति विवाद जैसे आरोपों में हिरासत में लिया गया है. ताजा कार्रवाई में, वार्ड नंबर 42 के पार्षद महेश कुमार शर्मा को बुधवार को बुराबाजार पुलिस स्टेशन द्वारा गिरफ्तार किया गया. उन्हें 7 जनवरी 2025 को दर्ज एक मामले की जांच के सिलसिले में हिरासत में लिया गया.
पुलिस ने बताया कि शर्मा पर भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, एक्सटॉर्शन और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल हैं. हालांकि, अधिकारियों ने मामले दर्ज करने या गिरफ्तारी के पीछे की विशिष्ट आरोपों का खुलासा नहीं किया है. आगे की जांच जारी है.
एक अन्य मामले में, नरकेलडांगा क्षेत्र के वार्ड नंबर 36 के TMC पार्षद सचिन सिंह को एक्सटॉर्शन और अनियमितताओं की कई शिकायतों के बाद गिरफ्तार किया गया. आरोपों के अनुसार, सिंह लंबे समय से पार्किंग ऑपरेटरों और अन्य स्थानीय प्रतिष्ठानों से पैसे वसूल रहा था और नागरिक एवं विकास परियोजनाओं से जुड़े किकबैक भी मांगता था. उसे धमकी और मारपीट के आरोप भी लगे हैं.
ये घटनाएं कुछ दिन पहले वार्ड नंबर 123 के पार्षद सुदीप पॉल की गिरफ्तारी के बाद आई हैं, जिन पर कई लाख रुपये एक्सटॉर्शन करने का आरोप था. अलीपुर कोर्ट में पेश किए जाने पर प्रदर्शनकारियों ने उन पर नारेबाजी की और अंडे व जूते फेंके. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल पुलिस ने TMC प्रवक्ता और राज्य उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को एक महिला को परेशान करने और उसकी संपत्ति पर कई सालों से अवैध कब्जा करने के आरोप में गिरफ्तार किया.
शिकायतकर्ता आरती रॉयचौधुरी ने आरोप लगाया कि मजूमदार करीब 12 साल पहले किराएदार के रूप में उनके घर में आए थे, लेकिन बाद में किराया बंद कर दिया और कब्जा बनाए रखा. इन घटनाओं के बीच पार्टी के अंदर विद्रोह तेजी से बढ़ रहा है. मात्र 13 दिनों में 'आकस्मिक' दिल्ली बैठक, हस्ताक्षर जालसाजी विवाद, TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव पर असंतोष और उत्तराधिकार की लड़ाई सामने आई है.
घटनाक्रम की शुरुआत 22 मई को विद्रोही TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बीच बंग भवन में हुई संयोगवश मुलाकात से मानी जा रही है. इसके बाद बुधवार को 60 विधायकों ने बागी तेवर अपनाते हुए पार्टी की विधायक दल पर कब्जा कर लिया और ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना. इस समूह को विधानसभा स्पीकर से औपचारिक मान्यता भी मिल गई. ये घटनाएं ममता बनर्जी द्वारा 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर स्थापित 28 वर्ष पुरानी पार्टी में अभूतपूर्व विभाजन का संकेत हैं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे गंभीर आंतरिक संकट में से एक है.