राहुल गांधी को गाजा की चिंता है, बांग्लादेशी हिंदुओं की नहींः अनुराग ठाकुर

Global Bharat 09 Aug 2024 08:41: PM 3 Mins
राहुल गांधी को गाजा की चिंता है, बांग्लादेशी हिंदुओं की नहींः अनुराग ठाकुर

BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की गाजा के बारे में चिंता जताने और बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी साधने के लिए आलोचना की. शुक्रवार को निचले सदन में बोलते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख को बांग्लादेश में हिंदुओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों की शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता की याद दिलाई.

अनुराग ठाकुर ने कहा कि हम सभी अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हाल ही में हुई घटनाओं से चिंतित हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख को बधाई दी, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों की शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया. हालांकि, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयानों में बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के बारे में कोई उल्लेख या चिंता व्यक्त नहीं की.

बांग्लादेश में नवगठित अंतरिम सरकार को सोशल मीडिया पोस्ट पर अपने बधाई संदेशों में अल्पसंख्यक सुरक्षा का उल्लेख न करने के लिए कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए, अनुराग ठाकुर ने कहा कि जब पूरा देश बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के बारे में चिंतित है, तो विपक्ष के नेता और विपक्षी सदस्य इस मुद्दे को संबोधित करने में अनिच्छुक क्यों हैं. अनुराग ठाकुर ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी ने गाजा के बारे में बार-बार बड़े-बड़े बयान दिए हैं, स्थिति के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है, लेकिन वे बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर चुप रहना पसंद करते हैं.

उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को गाजा के बारे में इतनी चिंता क्यों है, जबकि बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न की बात आती है तो वे चुप रहते हैं? राहुल गांधी और प्रियंका गांधी गाजा के बारे में लंबे-लंबे लेख लिखते हैं, लेकिन उनके दोहरे मापदंड तब स्पष्ट होते हैं जब वे बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के बारे में कुछ नहीं कहते.

इससे पहले शोसल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक पोस्ट में कहा कि हम जल्द ही सामान्य स्थिति में लौटने की उम्मीद करते हैं, जिससे हिंदुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित हो सके. भारत शांति, सुरक्षा और विकास के लिए दोनों देशों के लोगों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बांग्लादेश के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है.

केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा (आईबीबी) पर मौजूदा स्थिति की निगरानी के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. गृह मंत्रालय (एमएचए) के सीमा प्रबंधन प्रभाग ने एक आदेश की घोषणा की जिसमें उल्लेख किया गया है कि समिति बांग्लादेश में अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ संचार चैनल बनाए रखेगी ताकि भारतीय नागरिकों और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

बीएसएफ, पूर्वी कमान के अतिरिक्त महानिदेशक पांच सदस्यीय समिति के अध्यक्ष हैं. समिति की अध्यक्षता सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), पूर्वी कमान के अतिरिक्त महानिदेशक रवि गांधी करेंगे और इसमें एक महानिरीक्षक (आईजी), बीएसएफ फ्रंटियर मुख्यालय दक्षिण बंगाल, आईजी, बीएसएफ फ्रंटियर मुख्यालय त्रिपुरा, सदस्य (योजना और विकास), भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण (एलपीएआई), और सचिव, एलपीएआई इसके सदस्य होंगे.

बताते चलें कि बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिति अस्थिर बनी हुई है और व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों में तब्दील हो गई है. नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस ने गुरुवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली. इससे पहले सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली को समाप्त करने की मांग को लेकर छात्रों के नेतृत्व में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया था.

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