नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार को कुलगाम में दिल्ली ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपी डॉ. मुज़फ्फर अहमद राथर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट को अमल में लाया. काजीगुंड (जम्मू-कश्मीर) निवासी डॉ. मुज़फ्फर इस मामले के प्रमुख आरोपी हैं और अगस्त महीने में भारत से फरार हो चुके हैं. सूत्रों के अनुसार वे इस वक्त अफगानिस्तान में हो सकते हैं. सूत्रों ने बताया कि उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स और विभिन्न राज्यों में सक्रिय “व्हाइट-कॉलर” आतंकी मॉड्यूल के बीच कड़ी का काम किया था. जम्मू-कश्मीर पुलिस पहले ही उनके प्रत्यर्पण के लिए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की मांग कर चुकी है.
डॉ. मुज़फ्फर का ताल्लुक हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से भी है, जिस पर दिल्ली ब्लास्ट की जांच और उसके बाद सामने आए व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल की जांच के बाद जांच एजेंसियों की नजर है. उनके भाई डॉ. अदील राथर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उन्हें भी इस अंतर-राज्यीय जैश मॉड्यूल का एक बड़ा साजिशकर्ता माना जा रहा है. अदील रेड फोर्ट कार ब्लास्ट मामले में भी वांछित हैं.
डॉ. मुज़फ्फर के खिलाफ यह कार्रवाई तब हुई है जब 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए शक्तिशाली कार ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत के बाद इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुए थे. व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल सामने आने के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन ने चार डॉक्टरों – डॉ. मुज़फ्फर अहमद, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद – के नाम नेशनल मेडिकल रजिस्टर से हटा दिए थे. इन सभी पर ब्लास्ट के सिलसिले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं.
जांच की शुरुआत 10 नवंबर को तब हुई जब फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में डॉ. मुज़म्मिल शकील के किराए के कमरे से 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ. कुछ घंटों बाद ही यूनिवर्सिटी कैंपस और उसके आसपास से बहुत बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए गए. वहां कार्यरत डॉ. मुज़म्मिल को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसके बाद जांचकर्ता कथित नेटवर्क के कई अन्य लोगों तक पहुंचे. पुलिस का कहना है कि यह ग्रुप जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े अंतर-राज्यीय आतंकी नेटवर्क का कोर हिस्सा था और साजिशकर्ता बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के आसपास किसी बड़े हमले की फिराक में थे.