Kejriwal Liquor Scam: क्या शराब घोटाले से बरी होने की खुशी में अरविंद केजरीवाल कुछ भी कर रहे हैं, देश के इतिहास में शायद ये पहला मौका होगा, जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री ने जज के सामने ही खड़े होकर भरी अदालत में जज के फैसले पर ही सवाल उठा दिए, 10 ऐसी दलीलें गिनवाई, जिसे सुनकर पूरा कोर्टरूम सन्न रह गया, और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को ये तक कहना पड़ा कि आप मुझे घूरिए मत...पूरा मामला शराब घोटाले से जुड़े केस का है, जिसे हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच को सुनना है, पर केजरीवाल इन जज साहिबा को अपने केस से हटाना चाहते हैं, इसके लिए वो पहले अदालत से अनुमति मांगते हैं कि मैं ही वकील के रूप में दलील रखूंगा, और फिर जब 13 अप्रैल को अदालत पहुंचते हैं तो 10 दलीलें देते हैं...
हालांकि केजरीवाल की दलीलों का सीबीआई ने विरोध किया, और साफ कहा किसी कार्यक्रम में जाने से इस तरीके की बातें नहीं होनी चाहिए, यहां तक कि जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने भी ये कहा कि मैंने वहां कोई राजनीतिक बयान नहीं दिया.
हालांकि केजरीवाल ने जिस तरीके से दलीलें दी, उसे लेकर अदालत में ये टिप्पणी भी हुई कि आपको वकील होना चाहिए, जिस पर केजरीवाल शुक्रिया कहकर बाहर निकल गए. पर सवाल ये है कि क्या केजरीवाल ने जज पर इस तरीके के सवाल उठाकर नियमों का उल्लंघन किया है.
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में रिक्यूजल यानि जज के किसी केस से हटने का सिद्धांत भी बताया गया है, कई बार आपने सुना भी होगा कि फलां केस से किसी जज साहब ने खुद को अलग कर लिया, पर यहां केजरीवाल के केस में कहानी अलग है, उन्हें लग रहा है ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया और ऊपरी कोर्ट ने उसे रद्द कर दिया तो मामला गड़बड़ हो जाएगा, पर केजरीवाल को क्या हाईकोर्ट पर भरोसा नहीं है ये बड़ा सवाल है...
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुप्रीम कोर्ट में वकील बनकर पहुंचीं थीं, लेकिन तब मामला SIR से जुड़ा था. पर केजरीवाल अपनी ही केस की पैरवी के लिए सीधा इंजीनियर से बिना डिग्री वाले वकील बन गए, और अदालत से अनुमति लेकर जज पर ही सवाल उठाने लगे.