Ayodhya Ram Mandir Case : दुनिया भर में श्रीराम में आस्था रखने वाले लोगों के बीच यह प्रश्न उठ रहा है कि मंदिर की दानपेटी से चोरी की घटना किन परिस्थितियों में हुई. इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की जिम्मेदारियाँ क्या थीं और उन पर क्या आरोप लगे हैं. आइए एक-एक करके समझते हैं.
पहले आरोपी हैं रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू. इनके पास दानपात्रों की देखरेख की जिम्मेदारी थी. जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन्होंने व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था और वित्तीय अनियमितताओं में शामिल रहे. SIT का आरोप है कि बड़ी राशि के गबन के साथ-साथ अयोध्या के आसपास संपत्तियाँ भी खरीदी गईं.
दूसरे आरोपी हैं लौकुष मिश्रा। ये चढ़ावे की नगदी की गिनती करने वाले स्टाफ के सदस्य थे. जांच में आरोप है कि इन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया और व्यवस्था किसी दूसरे के हाथों में चली गई. यह कैसे हुआ और किसके कहने पर हुआ, इसकी जांच जारी है.
तीसरे आरोपी करोड़ेश पांडे हैं. इनकी जिम्मेदारी दान की राशि को गणना कक्ष तक पहुँचाना और गिनती सुनिश्चित करना था. जांच एजेंसियाँ इनकी भूमिका और संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही हैं.
चौथे आरोपी अविनाश शुक्ला हैं. इनके पास भी दान की राशि को गणना कक्ष तक पहुँचाने और गिनती कराने की जिम्मेदारी थी. आरोप है कि इन्होंने प्रक्रिया में अनियमितताएँ कीं और दान राशि के दुरुपयोग में शामिल रहे.
पाँचवें आरोपी रमाशंकर मिश्रा हैं. इनकी जिम्मेदारी दानपात्रों को गणना कक्ष तक ले जाना, उनकी गिनती कराना और निगरानी करना था। जांच में इन पर भी वित्तीय अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप लगे हैं.
छठे आरोपी मनीष यादव हैं. इन्हें दानपात्रों में आने वाले चढ़ावे की गिनती का काम सौंपा गया था. जांच के दौरान उनके घर से 36 लाख रुपये बरामद होने का दावा किया गया है, जिसकी जांच जारी है.
सातवें आरोपी सुभाषचंद्र श्रीवास्तव हैं. ये कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे. आरोप है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरती और अनियमितताओं में उनकी भी भूमिका रही. आठवें आरोपी अनुकल्प मिश्रा हैं. इनकी जिम्मेदारी रुपये की गिनती करना थी. जांच में आरोप है कि चोरी के बाद कुछ राशि बाथरूम में छिपाई गई और इस मामले में इनका नाम सामने आया है.
इन आठों आरोपियों की भूमिकाओं और उन पर लगे आरोपों से जांच एजेंसियाँ पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच केवल इन्हीं आठ लोगों तक सीमित रहेगी या इसके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क का भी खुलासा होगा. इस पूरे मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम सबसे प्रमुख रूप से सामने आया है, इसलिए जांच की सबसे बड़ी नजर फिलहाल उन्हीं की भूमिका पर टिकी हुई है.