रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने रविवार को बड़ा ऐलान किया है. उनके अनुसार, स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. साथ ही हर कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या तय करने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में पेश किया जाएगा. मेलोनी ने अपने पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा विंग की वार्षिक सभा में यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि विदेशी छात्रों के माता-पिता, जिन्हें स्कूल सिस्टम में एकीकृत होने में गंभीर दिक्कत हो रही है, उन्हें इतालवी भाषा सीखनी होगी.
क्या है प्रस्ताव?
मेलोनी ने कहा, ''जल्द ही कैबिनेट बैठक में एक उपाय पेश किया जाएगा, जिसमें हर कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या कानूनी रूप से तय की जाएगी. साथ ही स्कूल में बुर्का और नकाब पर बैन होगा.'' उन्होंने चेहरा ढकने वाले परिधानों पर जोर देते हुए कहा, ''स्कूल चेहरा खोलकर जाना चाहिए. इटली में कोई भी वास्तविक या कथित परंपरा के नाम पर यह तय नहीं कर सकता कि एक युवा महिला खुद को छिपाए.''
यह प्रतिबंध बुर्का और नकाब पर है, हिजाब (जो बाल ढकता है लेकिन चेहरा खुला रखता है) पर नहीं. विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने का तर्क देते हुए मेलोनी ने कहा कि अगर कक्षा में एक बच्चा इतालवी नहीं समझता तो वह जल्दी सीख सकता है. लेकिन अगर ऐसे बच्चों की संख्या ज्यादा या बहुमत हो जाए तो यह एकीकरण नहीं, बल्कि उपेक्षा है.
प्रवासन नीति का हिस्सा
इटली के स्कूलों में विदेशी छात्र कुल नामांकन का 11.6 प्रतिशत हैं. मेलोनी सरकार 2022 से सख्त प्रवासन नियंत्रण अपना रही है. इटली उत्तरी अफ्रीका से आने वाले प्रवासियों का प्रमुख प्रवेश द्वार है. सरकार ने तस्करों पर कार्रवाई और अल्बानिया में प्रवासी सुविधाओं जैसे कदम उठाए हैं.
यूरोप के कई देशों में पहले से चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध हैं. फ्रांस में सार्वजनिक स्थानों पर, बेल्जियम, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड में भी प्रतिबंध लागू हैं. नीदरलैंड में स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी इमारतों में बैन है. मेलोनी का यह प्रस्ताव प्रवासन, भाषा कौशल और सांस्कृतिक एकीकरण को स्कूलों के केंद्र में रखने वाला है.