बांग्लादेश बॉर्डर पर कुछ ऐसा चल रहा है, जो पाकिस्तान और म्यामांर के बॉर्डर से भी भयानक है. साल 1965 में जो गलती चीन ने की थी, वहीं बांग्लादेश ने 22 अगस्त की शाम को दोहराई है. पश्चिम बंगाल के कूच बिहार इलाके में, जहां भारत और बांग्लादेश का बॉर्डर लगता है. वहां BSF के कमांडो को फेंसिंग यानी बाड़ लगाने से बांग्लादेश की सेना ने रोक दिया और उसके बाद जो हुआ, उसे सुनकर आप भी कहेंगे इसका इलाज जरूरी है.
बीएसएफ के एक अधिकारी बताते हैं...साल 2012 में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ था, उसी के मुताबिक हमारे जवान मवेशियों के लिए बॉर्डर इलाके में बाड़ लगा रहे थे. ताकि कोई परेशानी न हो. लेकिन बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के जवानों ने इस पर आपत्ति जताई और काम रुक गया.
अक्टूबर महीने में दोनों देशों के BSF अधिकारियों के बीच होने वाले बैठक में ये मुद्दा गूंज सकता है, लेकिन यहां समझने वाली बात ये है कि जिस बांग्लादेश को भारत ने चलना सीखाया, वो अब भारत को आंख क्यों दिखा रहा है. वहां भारत विरोधी माहौल क्यों बन रहा है, उसकी सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान या चीन ही नहीं बल्कि कुछ और लोग भी हैं.
बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामिया से जुड़ा रहा जाकिर नाइक जो भारत विरोधी बयान देता है, उसकी भी बांग्लादेश में पकड़ अच्छी मानी जाती है. बीते दिनों मलेशिया के प्रधानमंत्री ने अपने भारत दौरे के दौरान खुलकर ये कहा था कि अगर भारत सबूत दे तो हम जाकिर को सौंप देंगे, जिसके बाद से जाकिर ने नई चाल चलनी शुरू कर दी है. लेकिन बॉर्डर पर होने वाली घटना से जाकिर का सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है, बल्कि बॉर्डर की घटना का सीधा संबंध भारत विरोधी माहौल बनाने वाली खालिदा जिया और उनके नेताओं से हो सकता है.
बांग्लादेश में भले ही फिलहाल किसी पार्टी की सरकार न हो, नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनूस को भले ही अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया हो, लेकिन उन पर खालिदा जिया से लेकर तमाम लोगों का दबाव जरूर दिख रहा है, बंधक वाली बात से वहां की सरकार भले ही इनकार कर रही हो, लेकिन युनूस के फैसलों में दबाव की झलक जरूर नजर आ रही है. यहां तक कि बॉर्डर पर बन रहे ऐसे हालात भी उसी के उदाहरण हैं, वहां अल्पसंख्यकों के साथ जो हो रहा है, उस पर पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी तक चिंतित हैं.
हालत ये हो गई है कि रोजाना बांग्लादेश बॉर्डर पर हजारों की संख्या में लोग भारत में शरण लेने के लिए पहुंच रहे हैं, जिन्हें किसी तरह लौटाया जा रहा है. बांग्लादेश के एक पूर्व जज को बकायदा बीएसएफ ने पकड़ा भी है, जो जबरन भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे. ऐसे में सवाल ये भी है कि जिस बांग्लादेश से भारत का रिश्ता शेख हसीना के दौर में सबसे शानदार रहा, वो शेख हसीना के हटते ही इतना बुरा कैसे हो गया.
क्या बांग्लादेश की ओर से इस बात का दबाव बनाने के लिए ये सब किया जा रहा है कि भारत किसी भी तरह शेख हसीना को वापस लौटा दे. दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते की शर्तें तो यही कहती है कि अगर किसी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा तो दोनों में से कोई देश उसे शरण नहीं देंगे, और बांग्लादेश ने बकायदा इस शर्त के तहत कई आरोपियों को वापस भी किया है. लेकिन अब हालत ऐसी हो गई है कि करीब 7 दिन पहले जब 5 भारतीय बांग्लादेश की सीमा में गलती से घुस गए तो उन्हें वापस करने से बांग्लादेश ने मना कर दिया.
ये वो लोग थे जो गंगा में तस्करी किए गए जानवरों को बचाने में BSF की मदद कर रहे थे, लेकिन अचानक उनकी बोट खराब हो गई और उन्हें नदी की धारा बांग्लादेश की सीमा की ओर बहा ले गई, जहां पांचों को पकड़कर बांग्लादेश की सेना ने जेल में बंद कर दिया.
कई दौर की बातचीत के बाद भी इन्हें नहीं छोड़ा गया, अब दिल्ली की दखल के बाद क्या होता है, इस पर सबकी नजरें हैं, लेकिन जो हालात बांग्लादेश बॉर्डर पर बन रहे हैं, वहां तख्तापलट होने के बाद से जो स्थिति दिख रही है, वो साफ-साफ ये बयां कर रही है कि BSF को और अलर्ट रहना होगा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को कोई तगड़ा प्लान बनाना होगा.