देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस ने एक 28 साल की बांग्लादेशी महिला को भारतीय पहचान पत्रों के साथ धर दबोचा. मूल नाम बबली खातून उर्फ बबली बेगम ने महज ढाई हजार रुपए खर्च करके खुद को “भूमि शर्मा” बना लिया और देहरादून में खुलेआम सरकारी योजनाओं का लाभ ले रही थी.
पुलिस जांच में सामने आया है कि बबली साल 2021 के कोविड लॉकडाउन के दौरान अवैध रास्ते से बांग्लादेश से भारत घुसी थी. दिल्ली में रह रही अपनी हमवतन ''सोफिया दीदी'' के संपर्क में आने के बाद उसने सीमा पार करने का रास्ता पूछा. सोफिया ने ही उसे बताया कि कहां से बिना किसी चेकिंग के भारत में घुसा जा सकता है. सीमा पार करते ही बबली सीधे दिल्ली पहुंची और फिर सोफिया के इशारे पर देहरादून भेज दी गई.
देहरादून आने के कुछ महीने बाद ही उसने 2022 में अधोईवाला (सहस्रधारा रोड) के फर्जी पते पर आधार कार्ड बनवा लिया. आधार में खुद को ''दिनेश शर्मा की पत्नी भूमि शर्मा'' दिखाया. जन्मतिथि भी बदल दी – बांग्लादेशी दस्तावेजों में दिसंबर 1987, भारतीय दस्तावेजों में 2001.
इसके बाद मुफ्त राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, सब कुछ सिर्फ 2500 रुपए में तैयार हो गया. पटेलनगर के आशीर्वाद एन्क्लेव में छापा मारकर पुलिस ने बबली को गिरफ्तार किया. उसके पास से बांग्लादेशी पहचान पत्र (नाम: बबली बेगम) के साथ-साथ सारे फर्जी भारतीय दस्तावेज बरामद हुए.
पूछताछ में उसने कबूला कि दस्तावेज बनने से पहले वह छिप-छिप कर रहती थी, लेकिन ''भूमि शर्मा'' बनते ही खुलकर घूमने-फिरने लगी. पुलिस ने उसी मोहल्ले में मजदूरी करने वाली एक अन्य बांग्लादेशी महिला बॉबी खातून को भी पकड़ा है. पटेलनगर थाने में बबली खातून के खिलाफ पासपोर्ट एक्ट, फॉरेनर्स एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है. एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं.
जांच जारी है कि देहरादून में ऐसे और कितने लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं और कौन-कौन इस रैकेट में शामिल है. एक छोटी-सी रकम में पूरा “भारतीय अवतार” तैयार कर लेने की इस घटना ने अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के गोरखधंधे पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं.