कोलकाता : पश्चिम बंगाल में बीते 14 दिनों के घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है. करीब 15 साल बाद कोलकाता की सड़कों पर बड़े पैमाने पर नमाज अदा नहीं हुई और न ही किसी बड़े सांप्रदायिक तनाव या दंगे की खबर सामने आई, इसे लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों अपनी-अपनी तरह से राजनीतिक संदेश देने में जुटे हैं.
राज्य सरकार की ओर से प्रशासनिक सख्ती बढ़ाने के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार अलर्ट मोड में दिखाई दिए. सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और कानून व्यवस्था को लेकर सीधे निगरानी की गई. इसी बीच मुख्यमंत्री सीएम सुवेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि किसी भी हाल में माहौल खराब नहीं होना चाहिए और आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए.
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि 15 सालों बाद इतनी सख्ती दिखाई गई है. बंगाल में लंबे समय से चले आ रहे तनाव और सड़क कब्जे जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाने की मुहिम छिड़ गया है. फिलहाल बंगाल की राजनीति में 14 दिनों का बदलाव बड़ा मुद्दा बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं.