
साल 2004 का दौर थाउन्हीं दिनों सिनेमा घरों में एक फिल्म आई, नाम था अब तक 56, उस फिल्म की कहानी कुछ ऐसी थीएक सनकी पुलिस अफसर अपराधियों को निपटाने के लिए कभी होटल में मिलता, तो कभी उनका पीछा करताकभी चुप रहकर गोली से बात करता तो कभी परिवार छोड़कर दाउद के गैंग को मिटाने निकल जाता! उस फिल्म में हीरो थे नाना पाटेकर, हांलाकि असली किरदार था मुंबई पुलिस के सिंघम अधिकारी दया नायक का! कोई नायक कहता हैं तो कोई महानायक कहता है! दया नायक के नाम पर ऐसे रिकॉर्ड हैं कि जो अपराधी एक बार पढ़ लेता है तो वो गलती से भी अपराध नहीं करता. महाराष्ट्र में उन दिनों कई गैंग एक्टिव थे.

लेकिन दाऊद और छोटा राजन गैंग की पकड़ बन चुकी थी! उसे रोकने के लिए मुबंई पुलिस ने कई सिंघम अधिकारी की टीम बनाई! जिसमें एक नाम दया नायक का भी थामहाराष्ट्र में खुलेआम एनकाउंटर हुए, एनकाउंटर की रफ्तार ऐसी थी कि महीने में कई एनकाउंटर होते! महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बना था. जहां अपराधियों का एनकाउंटर शुरू हुआ! ऐसा कहा जाता है कि दया नायक ने अधिकारी बनने से पहले होटल में वेटर का काम करते, पढ़ाई की, नौकरी मिली तो मिसाल कायम कर डाला! उन दिनों दाऊद का ऐसा रौब था कि वो जिस हीरोइन पर हाथ रखता वो गायब हो जाती! गुलशन कुमार से लेकर अनगिनत ऐसे कांड हैं जिनकी वजह से मुंबई अपराधियों की राजधानी कही जाने लगी! पर हर शेर पर कोई ना कोई सवा शेर होता है! कर्नाटक के रहने वाले दया नायक ही हैं जिन्हें सैफ अली ख़ान केस की जिम्मेदारी दी गई है!

दया नायक ने अपराधियों को ऐसे निपटाया कि नेताओं ने उन्हें ही फंसा दिया! आय से अधिक संपत्ति की जांच हुई! 6 साल तक नौकरी से सस्पेंड किया गया! कई बार पूछताछ हुई! यहां तक कि दया नायक को जेल तक जाना पड़ा! छोटा राजन के कई गुर्गों को निपटाया, कहा जाता है कि एक वेयर हाउस था,जहां दया अपराधियों को ठोंक देते थे! दया नायक एक इंटरव्यू में खुद कहते हैं कि मुझे कोई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहता है तो मुझे पसंद नहीं आता है! 31 दिसंबर साल 1996 में पहला एनकाउंटर किया! उसके बाद गैंग मिटाने वाली स्पेशल टीम में भेज दिया गया था! एक पत्रकार के दावे के बाद सिंघम छवि टूट गई, कहा गया कि ये दाऊद के साथ मिलकर मुंबई में रैकेट चलाते हैं! सच्चाई कभी किसी से दबती नहीं, मकोका कोर्ट ने सिंघम अधिकारी को क्लिनचिट दी, और दोबारा नौकरी पर लौट गए.

इन्हीं दया नायक को सैफ अली ख़ान केस की कमान सौंपी गई है, जैसे ही जिम्मेदारी मिली जांच शुरू हो गई! और पहली तस्वीर आ गई है! दया नायक की एंट्री साफ दावा करता है कि सैफ अली ख़ान के साथ कोई बड़ी अनहोनी होने वाली थी! दया का अंदाज़ बताता है कि सैफ केस में कोई ना कोई गैंग है! क्या वो लॉरेंस गैंग है? या लॉरेंस को बदनाम करने के लिए उसका विरोधी गैंग बंबीहा गैंग है? क्या कहानी है? क्या कोई प्रॉपर्टी की कहानी है? या सिर्फ एक चोर चोरी करने आता है, सैफ अली खान को चाकू मारता है और लौट आता है! फिल्मी कहानी को समझने के लिए दया नायक की एंट्री बेहद ज़रूरी थी!

दया नायक का स्टाइल ऐसा है कि जब इनका तबादला नागपुर कर दिया गया तो ये गए ही नहीं! एक बार अपराधी की पहचान कर ली तो वही करते जो मन करता है, किसी नेता की नहीं सुनते! अब तक 56 में नाना पाटेकर ने एकदम किरदार उतारा है! कोई इन्हें सिंघम तो कोई सनकी कहता एक किस्सा बड़ा मशहूर हुआ, कहा जाता है कि एक बार इनको छोटा राजन ने फोन पर धमकी दी, उसने कहा था कि तेरा परिवार नहीं है क्या? तू क्यों नहीं डरता है? तो जवाब में दया नायक कहते हैं मेरे परिवार में 40 हज़ार मुंबई पुलिस के जवान हैं! सैफ अली खान केस में करीना से भी पूछताछ हो सकती है! अब नायक की एंट्री हुई है तो सारे खलनायक बाहर आएंगे!