जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने हाल ही में मुरादाबाद में एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, "अगर आप सऊदी अरब जाएं और काबा को खोदें तो उसके नीचे भी एक मंदिर मिलेगा." यति नरसिंहानंद का यह बयान काफी विवादों में आ गया है, क्योंकि यह काबा को लेकर उनकी विवादित राय को दर्शाता है. इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के बारे में भी टिप्पणी की और कहा कि मोहन भागवत भगवान नहीं हैं. यति नरसिंहानंद ने यह भी कहा कि हर सनातनी और सनातन धर्म के धार्मिक नेता चाहते हैं कि सभी सनातन धर्म के मंदिरों को पुनः मुक्त किया जाए और उन्हें फिर से स्थापित किया जाए.
यति नरसिंहानंद की गिरफ्तारी
इस बयान के बाद यति नरसिंहानंद को मुरादाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए पहुंचते समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. वह गाजियाबाद से मुरादाबाद जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें मुरादाबाद जिले की सीमा पर हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक हिरासत में रखा. मुरादाबाद के एसपी सिटी रण विजय सिंह ने बताया कि यति नरसिंहानंद के पास कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं थी, इसलिए उन्हें कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई. इसके बाद, यति नरसिंहानंद को पुलिस स्टेशन ले जाया गया और उन्हें बताया गया कि वे बिना अनुमति के कार्यक्रम नहीं कर सकते थे. इसके बाद, उन्होंने मुरादाबाद जाने का इरादा बदल लिया और गाजियाबाद वापस लौटने का निर्णय लिया.
"हमारे मंदिर क्यों वापस नहीं किए जाते?"
यति नरसिंहानंद ने इस मौके पर मोहन भागवत की एक और टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि भागवत ने कहा था कि हिंदू हर मस्जिद के नीचे मंदिर नहीं खोजें. इस पर यति नरसिंहानंद ने कहा, "हम भागवत के कहने से कुछ नहीं करेंगे, क्योंकि हमारे पास देशभर में मंदिर हैं और हमें उन्हें वापस लेने की जरूरत है. क्यों नहीं हम उन्हें खरीदकर वापस प्राप्त करें?" उनका यह बयान एक बार फिर सनातन धर्म के मंदिरों की वापसी के मुद्दे को उठा रहा था.

प्रोफेट मोहम्मद पर उनकी विवादित टिप्पणी
यति नरसिंहानंद के बयानों को लेकर पहले भी विवाद खड़ा हो चुका है. 29 सितंबर को गाजियाबाद के लोहियानगर हिंदी भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में यति नरसिंहानंद ने एक और विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था, "हर साल हम मेघनाथ और कुम्भकर्ण का पुतला जलाते हैं. उनका अपराध छोटा था, लेकिन अगर आज जलाना है तो मुहम्मद का पुतला जलाओ." इस टिप्पणी के बाद, देश के कई हिस्सों में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. मुसलमान समुदाय ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की और कई स्थानों पर पथराव भी हुआ. गाजियाबाद में डासना देवी मंदिर के बाहर मुस्लिम समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे थे और कई एफआईआर दर्ज की गई थीं.
यति नरसिंहानंद का जीवन परिचय
यति नरसिंहानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुआ था. उनका असली नाम दीपक त्यागी है. उनका परिवार सरकारी नौकरी में था और वे पांच भाई-बहनों में एक थे. दीपक त्यागी ने 1989 में रूस का रुख किया और वहां के एक संस्थान से रासायनिक तकनीकी में डिग्री प्राप्त की. इसके बाद, उन्होंने लंदन और मॉस्को में काम किया. लेकिन 1997 में अपनी मां की बीमारी के कारण उन्हें भारत लौटना पड़ा. इसके बाद, 2007 में उन्होंने गाजियाबाद के डासना मंदिर में पुजारी के रूप में कार्य शुरू किया. इस दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर दीपेंद्र नारायण सिंह रखा और बाद में सन्यास लेने के बाद अपना नाम यति नरसिंहानंद गिरी रख लिया.