नई दिल्ली: सरकारी या प्राइवेट नौकरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को जेल होते ही नौकरी चली जाती है! फिर नेताओं के लिए कानून अलग क्यों होना चाहिए? अरविंद केजरीवाल को जेल हुई लेकिन वो लंबे समय तक जेल से मुख्यमंत्री बने रहे! तिहाड़ से सरकार चलाई, कानून में पहले कोई प्रावधान नहीं था, क्योंकि केजरीवाल की तरह पहले कोई उदाहरण नहीं मिला था. अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक ऐसा कानून ला रहे हैं, जिसमें कोई भी फंस सकता है! पहले समझिए कानून में क्या है? क्यों कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी को डर सता रहा है?
दिल्ली में केजरीवाल के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया गया, करीब एक साल तक तिहाड़ जेल से मंत्रालाय चलाया, दिल्ली के मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शराब घोटाले में 17 महीने जेल में रहे लेकिन दूसरे दिन ही उन्होंने इसीतफा दे दिया! तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी तो 241 दिन तक जेल में रहे लेकिन इस्तीफा नहीं दिया! इधर केजरीवाल CM के पद पर रहते हुए गिरफ्तार हुए! झारखण्ड के CM पद पर रहते ही हेमंत सोरेने की गिरफ्तारी हुई! हालांकि उन्होंने जेल जाने से पहले इस्तीफा दे दिया! अब इसलिए मोदी-शाही की जोड़ी कानून ला रही है!
ये संविधान का 130वां संशोधन है: केजरीवाल की गिरफ्तारी के साथ ही कानून को लेकर बहस छिड़ी थी. एक तरफ उन्हें ED ने तिहाड़ में रखा था. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए भेजा था! हालांकि ओवैसी से लेकर कांग्रेस तक इसका विरोध कर रही है...
विरोध कर रहे सांसदों को डर है कि केंद्र में बैठी सरकार इस कानून का दुरुपयोग कर सकती है, क्योंकि जो नेता जेल जाएंगे, जरूरी नहीं कि उनपर आरोप सिद्ध हो जाए और आदालती कार्रवाई में दोषी ठहराया जाए. इस स्थिति में अगर उनका पद चला जाता है तो क्या होगा? कानून में मौजूद इनके प्रावधानों पर भी गहन चर्चा होनी चाहिए.