नई दिल्ली: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में एक चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. यहां भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया है. इस गठबंधन में अजित पवार की एनसीपी भी शामिल है, जिसे 'अंबरनाथ विकास आघाडी' नाम दिया गया है.
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने स्पष्ट किया कि यह केवल भाजपा-कांग्रेस का समझौता नहीं है, बल्कि विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ता शिंदे गुट की शिवसेना के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हुए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि पार्टी लाइन और चुनाव चिह्नों को दरकिनार रखकर स्वतंत्र उम्मीदवारों सहित कई लोग इस मोर्चे में शामिल हैं. इसलिए भाजपा-कांग्रेस गठबंधन की खबरें गलत हैं.
इस समझौते से शिवसेना में तीखी प्रतिक्रिया हुई है. शिंदे गुट के विधायक बालाजी किणीकर ने इसे 'अशोभनीय गठबंधन' करार देते हुए भाजपा पर विश्वासघात का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करने वाली पार्टी अब कांग्रेस के साथ सत्ता साझा कर रही है, जो शिवसेना के साथ धोखा है.
दूसरी ओर, भाजपा ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि शिंदे गुट के साथ गठबंधन ही वास्तव में अनुचित होता. भाजपा उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने शिंदे गुट पर पिछले 25 वर्षों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और दावा किया कि शिवसेना से व्यापक गठबंधन की कोशिशें की गईं, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.
यह घटना स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ता की चाह में विचारधारा से ऊपर उठकर होने वाले समझौतों का उदाहरण पेश करती है.