नई दिल्ली: ये तस्वीरें हैं यूपी के अमरोहा जिले की,, व्हाइट टीशर्ट में खड़े व्यक्ति का नाम है पिंटू भाटी, जिसकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य है, जबकि खुद ये बीजेपी का नेता है, पर उसी आड़ में अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर चला रहा था, हनक ऐसी कि उसके सेंटर की कोई जांच करने तक की हिमाकत नहीं करता, लेकिन 3 मई की शाम अचानक इसके हसनपुर के रहरा अड्डे वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचती हैं, CMO सत्यपाल सिंह की टीम देखती है, सेंटर पर कोई डॉक्टर ही मौजूद नहीं है, तो सवाल था क्या ये सेंटर सिर्फ गरीबों का पैसा लूटने के लिए बना है, और डॉक्टर की बजाय कोई और मरीजों की जांच करता था, CMO साहब ने तुरंत सेंटर सील करने का आदेश दिया, लेकिन जैसे ही बाहर निकल पाते, पिंटू भाटी ने गाड़ी के पास ही रोक लिया, और उनसे भिड़ गया.
हालांकि पिंटू भाटी का कहना था जब हर महीने 50 हजार रुपये स्वास्थ्य विभाग के लोग उससे ले जा रहे हैं, तो फिर ये कार्रवाई किस बात की, सवाल इस बात का भी है जब स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लगातार अस्पतालों में छापा मार रहे हैं, सरकारी अस्पतालों की हालत सुधरने का दावा कर रहे हैं, और प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने को लेकर एक्शन के दावे कर रहे हैं तो फिर प्राइवेट अस्पताल में नियमों का उल्लंघन कैसे हो रहा है, पिंटू भाटी जैसे लोग क्या ये भूल गए कि योगीराज में गलत करने वाला चाहे कोई भी हो, उस पर एक्शन जरूर होता है.
आखिर वो 50 हजार रुपये महीना लेने वाला व्यक्ति कौन है, मौके पर पहुंची भीड़ ये साफ इशारा करती है वहां कुछ भी हो सकता था, हालांकि अमरोहा पुलिस की ओर से ट्वीट कर ये जानकारी दी जाती है कि दिनांक 03.05.2025 को सीएमओ अमरोहा द्वारा अवैध रुप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंट्रो को सील किया गया था . जिसपर अल्ट्रासाउंड सेंट्र मालिक द्वारा आपत्ति प्रकट की गयी थी . प्रकरण में वैधानिक कार्यवाही की जा रही है . कानून एवं शांति व्यवस्था सामान्य है.
अमरोहा से पहले यूपी के कई जिलों में ऐसी छापेमारी वाली कार्रवाई हुई है, बीते साल अक्टूबर महीने में ही योगी सरकार ने ये आदेश जारी किया था कि प्राइवेट अस्पताल में बने मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने वाला फॉर्मूला अब नहीं चलेगा, जो डॉक्टर जानबूझकर मरीजों को महंगी दवाईयां लिखते हैं, जो बाहर कहीं नहीं मिलती, उन्हें वहीं के मेडिकल स्टोर से लेना होता है, ये चूना लगाने वाला काम अब नहीं होना चाहिए, मरीज को ऐसी दवा लिखी जाए कि वो कहीं से भी ले सके, अगर आपको कोई भी प्राइवेट हॉस्पिटल ऐसा करने के लिए मजबूर करता है, तो आप इसकी सीधा शिकायत यूपी के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से ट्वीट करके कर सकते हैं.
साल 2022 में ब्रजेश पाठक ने एक नई सुविधा शुरू की थी, जिसमें वो खुद किसी भी सरकारी अस्पताल के मरीज को फोन कर उससे हाल-चाल लेते थे, पूछते थे कोई दिक्कत तो नहीं है, ऐसे में किसी भी तरह की परेशानी होने पर सीधा शिकायत करें, और अवैध क्लीनिक हों या मेडिकल सेंटर उनकी जानकारी अपने जिले के स्वास्थ्य अधिकारी को दें, ताकि लोगों की जान से कोई खिलवाड़ न कर पाए.