लैंसडाउन: उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंटोनमेंट शहर लैंसडाउन का नाम बदलने के प्रस्ताव ने राजनीतिक और जनता में विवाद खड़ा कर दिया है. बीजेपी विधायक ने केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव को रद्द करने की अपील की है और चेतावनी दी है कि इससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है.
लैंसडाउन विधायक दिलीप रावत ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर लैंसडाउन कैंटोनमेंट का प्रस्तावित नाम जसवंत गढ़ रखने को अत्यंत खेदजनक बताया है. अपने पत्र में रावत ने कहा कि लैंसडाउन ने वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान बना ली है. नाम बदलने से इस पहचान को कमजोर होने का खतरा है.
उन्होंने लिखा कि मेरे संज्ञान में आया है कि लैंसडाउन कैंटोनमेंट का नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है, जो अत्यंत खेदजनक है. विधायक ने चेतावनी दी कि यह कदम शहर की पर्यटन स्थली के रूप में स्थिति को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाएगा और पौड़ी गढ़वाल जिले में लोगों की आजीविका प्रभावित करेगा. रावत ने यह भी कहा कि स्थानीय लोग नाम बदलने के पक्ष में नहीं हैं.
नाम बदलने के तर्क पर सवाल
विधायक ने आगे कहा कि औपनिवेशिक काल के नाम बदलने के बजाय बुनियादी सुविधाओं और शहर की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर कुछ बदलना ही है तो सुविधाएं और शहर की हालत बदलिए. सिर्फ नाम बदलने से कुछ नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर गुलामी की मानसिकता मिटाने का उद्देश्य है, तो गोवा, देहरादून के लैंसडाउन चौक और कॉर्बेट नेशनल पार्क जैसे नामों पर भी विचार करना चाहिए.
प्रस्ताव पर जनता की राय मांगी गई
यह विवाद 10 अप्रैल को लैंसडाउन कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा जारी नोटिस के बाद शुरू हुआ, जिसमें 1962 के युद्ध नायक राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के नाम पर शहर का नाम बदलने के प्रस्ताव पर आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित किए गए थे. बोर्ड के सीईओ हर्षित राज सिंह ने कहा कि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के निर्देश पर भेजा गया है और जनता की राय लेने के लिए सार्वजनिक नोटिस और विज्ञापनों के माध्यम से फीडबैक मांगा जा रहा है.
सेना से जुड़ाव और विरोध की चेतावनी
विधायक दिलीप रावत ने शहर के भारतीय सेना से गहरे संबंधों की ओर भी इशारा किया. उन्होंने बताया कि गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में लाखों सैनिकों का प्रशिक्षण होता रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जनता की भावना के विरुद्ध यह कदम उठाया गया तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होंगे. उन्होंने कहा किमैं जनता के साथ संगठित रूप से विरोध प्रदर्शन में खड़ा रहूंगा.
नागरिक समस्याओं का पृष्ठभूमि
नाम बदलने का यह विवाद तब उठा है जब स्थानीय निवासियों में कैंटोनमेंट के सिविल क्षेत्र को नगरपालिका में बदलने में हो रही देरी को लेकर पहले से ही नाराजगी है. लैंसडाउन में 10 फरवरी 2020 से कोई निर्वाचित बोर्ड नहीं है और वर्तमान में इसे एक तदर्थ समिति चला रही है. 1887 में स्थापित यह कैंटोनमेंट अभी भी कैंटोनमेंट एक्ट के तहत कार्य करता है.