नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) से डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद सार्वजनिक विवाद के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं. नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चड्ढा ने कहा कि AAP के राज्यसभा सांसदों में से दो-तिहाई सदस्यों ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए भाजपा के साथ विलय करने का फैसला किया है.
उन्होंने कहा कि हमने फैसला किया है कि हम, जो AAP के राज्यसभा में दो-तिहाई सदस्य हैं, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को भाजपा के साथ विलय कर रहे हैं. AAP के अन्य राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी पार्टी से इस्तीफा देने और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की. चड्ढा ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि स्वाती मालीवाल और हरभजन सिंह समेत कई अन्य AAP सांसद भी भाजपा में शामिल होने का फैसला कर चुके हैं.
सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के साथ, AAP अब ऊपरी सदन में सिर्फ 3 प्रतिनिधियों के साथ रह गई है. अपने फैसले की वजह बताते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने खून-पसीना एक करके निखारा था, वह अब अपनी स्थापना के सिद्धांतों से भटक चुकी है.
उन्होंने कहा कि जिस AAP को मैंने अपना खून और पसीना देकर, अपनी जवानी के 15 साल समर्पित करके तैयार किया था, वह अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से पूरी तरह भटक चुकी है. अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत फायदे के लिए काम करती है... पिछले कुछ सालों से मुझे लग रहा था कि मैं सही व्यक्ति गलत पार्टी में हूं. इसलिए आज हम घोषणा करते हैं कि मैं AAP से दूरी बना रहा हूँ और जनता के करीब आ रहा हूं.
सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा, संदीप सिंह और अशोक मित्तल जल्द ही भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से मिलकर औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होंगे. अपने फैसले का समर्थन करते हुए चड्ढा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि मोदी सरकार ने वो मजबूत फैसले लिए हैं जिन्हें पहले की सरकारें लेने में हिचकिचाती थीं, जिसमें आतंकवाद से निपटना और भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करना शामिल है.
उन्होंने कहा कि जनता ने इस नेतृत्व को न एक बार, न दो बार, बल्कि तीन बार समर्थन दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री के अधीन और अमित शाह के साथ काम करने की अपनी इच्छा जताई. यह घोषणा AAP के अंदर बढ़ते तनाव के बीच आई है, जिसमें चड्ढा को संसदीय पद से हटाया गया था. यह हाल के वर्षों में AAP की नेतृत्व व्यवस्था में सबसे बड़ा आंतरिक टूटना माना जा रहा है.