Bengal Elections: बंगाल में शाह का ‘डेरा’, वॉर रूम से सख्त निगरानी—हिंसा और रणनीति के बीच तेज हुआ सियासी संग्राम

Amanat Ansari 23 Apr 2026 06:56: PM 2 Mins
Bengal Elections: बंगाल में शाह का ‘डेरा’, वॉर रूम से सख्त निगरानी—हिंसा और रणनीति के बीच तेज हुआ सियासी संग्राम

Bengal Assembly Elections: यह तस्वीर है बंगाल बीजेपी कार्यालय की...जहां गृहमंत्री अमित शाह अपनी गाड़ी से उतरकर सीधा ऑफिस के अंदर दाखिल होते हैं, और अगले 6 दिनों तक ये बंगाल में ही रहने वाले हैं, ऐसी खबरें भी सामने आई है...कुल 15 दिनों तक शाह ने इस चुनाव में बंगाल में डेरा डाला, जो ममता बनर्जी को चुभने लगा है...क्योंकि शाह वहां बैठकर 3 बड़े काम कर रहे हैं...

  • पहला- वॉर रूम से अमित शाह सीधे पोलिंग एजेंटों और जिला प्रभारियों के संपर्क में हैं
  • दूसरा- रीयल-टाइम डेटा, मतदान प्रतिशत और संवेदनशील बूथों पर हो रही गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं.
  • तीसरा- किसी भी अप्रिय घटना या मतदान में बाधा की स्थिति में वॉर रूम से सीधे चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट करेंगे.

लेकिन यहां एक सवाल ये भी है कि चुनाव तो तमिलनाडु में भी है, फिर शाह वहां क्यों नहीं गए, चुनाव तो बिहार में हुए थे, फिर शाह वहां इस तरीके की हाईटेक निगरानी क्यों नहीं कर रहे थे, अब तक किसी राज्य में वो 15 दिन डेरा डालकर क्यों नहीं बैठे, वो मनोवैज्ञानिक वजह क्या है, इसे समझना होगा, जिसकी कहानी इन तस्वीरों में छिपी है...

ये तस्वीरें हैं दिनाजपुर की, जहां बीजेपी के उम्मीदवार सुवेंदु सरकार को ही दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया, तो बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ वहां क्या होता होगा, हर गांव, हर गली में जहां बीजेपी का गढ़ नहीं है, वहां इनके साथ कैसा व्यवहार होता होगा, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं, और बीजेपी के वोटर्स, जिनके पास कोई सुरक्षा नहीं होती, उनका क्या अंजाम कुछ इलाकों में होता होगा, इसकी भी कहानियां आपने सुनी होंगी, इसीलए राजनीति के जानकार कहते हैं कि शाह का बंगाल में डेरा डालना सिर्फ चुनावी रणनीति बनाना उसकी लाइव मॉनिटरिंग करना भर नहीं है, बल्कि ये उस मनोविज्ञान का हिस्सा है, जो वहां के बीजेपी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को हिम्मत देगा.

चुनाव आयोग अपना काम अपने तरीके से कर रहा है, अर्धसैनिक बलों के जवानों की जितनी जरूरतें हैं, वो मांग रहा है, और उनकी ड्यूटी लगा रहा है, और शाह चूंकि देश के गृहमंत्री भी हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारियां ऐसे वक्त में बढ़ जाती हैं...शायद इसीलिए वो रैलियों में घूम-घूमकर पहले कहते हैं 23 अप्रैल को ममता के गुंडे बाहर न निकलें, इसका ध्यान रखना है, और फिर कहते हैं उल्टा लटका देंगे...

क्योंकि बंगाल में कानून तोड़ने की भी सारी इंतेहा पार हो जाती है...ये जो चेहरा आपको दिख रहा है, ये व्यक्ति वो सरगना है, जिसने चुनाव से पहले ग्लोबल भारत टीवी की टीम को मुर्शिदाबाद में निशाना बनाया था...और अब आर भारत के रिपोर्टर के खिलाफ भी इसने साजिश रची, ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं...तो सवाल है मुर्शिदाबाद में क्या माइंडवॉश का गढ़ बनता जा रहा है, जहां इन लोगों के मन मुताबिक बात न करने पर पत्रकार तक पर हाथ उठा दिया जाता है, उसे पाइप से बांध दिया जाता है...
बाइट- अभिषेक सर का वो वीडियो पाइप से बांध दिया.

ये सवाल ग्लोबल भारत टीवी ने तब भी उठाया था और आज जब देश के सामने मुर्शिदाबाद की स्थिति सामने आई है, खुद हुमायूं कबीर को ही घेरा गया, तो फिर ये सवाल गूंजने लगा कि बंगाल की कानून व्यवस्था को क्या हो गया है...वहां की पुलिस आखिर क्या कर रही है, चुनाव के वक्त अर्धसैनिक बलों ने जब मोर्चा संभाला तो क्या उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस तरीके की घटनाएं वहां हो सकती है, और इसके लिए पहले से तैयारी की जानी चाहिए....गृहमंत्री अमित शाह भी इस बात को बेहतर जानते हैं कि बंगाल के चुनाव में उपद्रव का रिकॉर्ड कैसा रहा है, खुद चुनाव आयोग भी इस बात को अच्छी तरह समझता है...

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