नई दिल्ली: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (23 और 29 अप्रैल) से पहले लगभग 800 तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं और नेताओं की पहचान करने का निर्देश दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि 30 जून तक इन लोगों को निवारक गिरफ्तारी (Preventive Arrest) नहीं की जा सकती.
चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सरथी सेन की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारियों को अग्रिम रूप से निवारक गिरफ्तारियां करने से रोका गया है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
बेंच ने टिप्पणी की, “उन्हें अग्रिम रूप से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.” साथ ही स्पष्ट किया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां विशिष्ट मामलों में “कानून के अनुसार” कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं. यह मामला उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया जिसमें यह आशंका जताई गई थी कि चुनाव से पहले लगभग 800 टीएमसी सदस्यों को निवारक हिरासत में लिया जा सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग के कथित निर्देश पर उनकी पहचान की गई है.
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि यह सूची केवल चुनाव के दौरान संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए तैयार की गई थी, न कि किसी को गिरफ्तार करने के लिए. चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने बेंच से कहा, “चुनाव आयोग ने किसी को भी गिरफ्तार करने का निर्देश नहीं दिया है. यह केवल चरम स्थितियों के लिए है. कार्रवाई तभी की जाएगी जब कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण चुनाव में बाधा डालेगा.”
नायडू ने कहा कि यह अभ्यास चुनाव आयोग को प्राप्त गोपनीय रिपोर्टों के आधार पर किया गया था और कुछ व्यक्तियों पर नजर रखना शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. उन्होंने आगे कहा, “ये उपाय कुछ गोपनीय रिपोर्टों के आधार पर लिए गए हैं. अगर कुछ व्यक्तियों पर नजर नहीं रखी गई तो स्थिति बिगड़ सकती है.”
नायडू ने यह भी तर्क दिया कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निवारक उपाय अपनाने का अधिकार है और अगर किसी के साथ अन्याय होता है तो वह कानूनी उपाय कर सकता है.
चीफ जस्टिस पॉल ने इस कदम की तर्कसंगतता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने पहले ही निष्पक्ष मतदान के लिए व्यापक इंतजाम कर लिए हैं. बेंच ने पूछा, “चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए व्यापक कदम उठाए हैं. फिर ऐसी निर्देश जारी करने का क्या तर्क है?”
याचिका को तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्यान बनर्जी ने कोर्ट में तत्काल उल्लेख (Urgent mentioning) किया था. उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में व्यापक आशंका है कि मतदान से पहले उन्हें निवारक हिरासत में लिया जा सकता है. यह सुनवाई पश्चिम बंगाल में बढ़ी हुई राजनीतिक तनाव के बीच हुई है, जहां विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले हैं.