Saudi Arabia to Buy Turky Kaan: अमेरिका और सऊदी अरब के बीच तनाव की खबरें फिर से सुर्खियों में हैं. सऊदी अरब अपनी वायुसेना को मजबूत करने के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस बार अमेरिका के F-35 के अलावा दूसरे विकल्प भी तलाश रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब तुर्की के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के KAAN स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर चर्चा कर रहा है.
दोनों देशों के बीच इस प्रोजेक्ट में खरीद, संयुक्त निवेश और स्थानीय उत्पादन की बातें चल रही हैं. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन ने भी संकेत दिए हैं कि सऊदी अरब के साथ इस क्षेत्र में साझेदारी किसी भी समय आगे बढ़ सकती है. सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका से F-35 खरीदने की कोशिश कर रहा था. 2025 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप प्रशासन ने F-35 की बिक्री को मंजूरी देने का ऐलान किया था. लेकिन सऊदी अब पूरी तरह एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता.
विजन 2030 के तहत सऊदी अरब अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाना चाहता है, जिसमें तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय निर्माण शामिल है. तुर्की इस मामले में ज्यादा लचीला रुख दिखा रहा है. वह सिर्फ विमान बेचने को तैयार नहीं है, बल्कि संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी शेयरिंग पर भी सहमत है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब 20 से 100 तक KAAN जेट्स खरीदने या प्रोजेक्ट में निवेश करने पर विचार कर रहा है.
ट्रंप प्रशासन की चिंता क्यों?
अमेरिकी अधिकारी सऊदी अरब से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं कि जब F-35 जैसा उन्नत विमान उपलब्ध है, तो तुर्की के KAAN की जरूरत क्यों पड़ रही है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इससे अमेरिका का रक्षा निर्यात बाजार प्रभावित हो सकता है. वे 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत चाहते हैं कि सहयोगी देश मुख्य रूप से अमेरिकी हथियार ही खरीदें. साथ ही, क्षेत्रीय संतुलन (खासकर इजरायल की सैन्य बढ़त) को भी ध्यान में रखा जा रहा है.
KAAN जेट की खासियत
तुर्की ने अमेरिका से F-35 प्रोग्राम में शामिल होने के बाद S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के कारण बाहर होने के बाद अपना खुद का पांचवीं पीढ़ी का विमान विकसित किया. KAAN स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है, रडार में आसानी से नहीं पकड़ा जाता, सुपरसोनिक स्पीड से उड़ सकता है और हथियारों को अंदर छिपाकर रखने की क्षमता रखता है. यह उन देशों के लिए एक विकल्प बन रहा है जो अमेरिकी शर्तों से पूरी तरह बंधना नहीं चाहते.
दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. 2026 में विश्व रक्षा प्रदर्शनी में भी KAAN के मॉडल पर सऊदी झंडा लगाकर प्रदर्शन किया गया था, जो साझेदारी का संकेत माना गया. हालांकि, यह कोई अंतिम सौदा नहीं है और आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है. सऊदी अरब F-35 और KAAN दोनों विकल्पों पर काम कर रहा लगता है, ताकि अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ा सके. यह मिडिल ईस्ट की रक्षा राजनीति में एक नया मोड़ हो सकता है.