Corporate Dress Code: महाराष्ट्र में इन दिनों कॉर्पोरेट ड्रेस कोड को लेकर नई बहस छिड़ गई है. नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ में कथित धर्म परिवर्तन के आरोपों के बीच शुरू हुआ विवाद अब लेंसकार्ट तक पहुंच गया है. कंपनी पर आरोप लगे कि उसने पहले कुछ धार्मिक प्रतीकों को अनुमति दी, जबकि अन्य पर रोक जैसी स्थिति बनाई, जिससे सोशल मीडिया पर विरोध तेज हो गया.
इसी मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में एक समान ड्रेस कोड लागू करने की वकालत करते हुए हिजाब और बुर्का पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई. उनका कहना है कि अगर कार्यस्थल पर किसी एक धर्म के प्रतीकों पर पाबंदी लगाई जाती है, तो सभी के लिए समान नियम होने चाहिए.
राणे ने स्कूलों और कॉलेजों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां यूनिफॉर्म और ड्रेस से जुड़े नियम लागू होते हैं, उसी तरह कॉर्पोरेट दफ्तरों में भी एकरूपता जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि नियम किसी एक समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि सभी पर बराबर तरीके से लागू होने चाहिए.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेंसकार्ट की एक कथित आंतरिक गाइडलाइन सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें कर्मचारियों के लिए ड्रेस को लेकर कुछ निर्देश बताए गए थे. इसी के बाद कंपनी को आलोचना का सामना करना पड़ा.
हालांकि कंपनी ने बाद में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह किसी भी धर्म या सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ नहीं है. उसने एक नई स्टाइल गाइड जारी कर यह साफ किया कि सभी तरह के धार्मिक प्रतीकों का सम्मान किया जाएगा. साथ ही, अगर किसी कर्मचारी की भावनाएं आहत हुई हों तो कंपनी ने इसके लिए खेद भी जताया.
कंपनी के सह-संस्थापक पीयूष बंसल ने भी सफाई देते हुए कहा कि जो दस्तावेज़ वायरल हुआ, वह पुराना था और उसमें मौजूद गलत नीति को पहले ही हटाया जा चुका है. उन्होंने दोहराया कि कंपनी कार्यस्थल पर सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता देती है. इस पूरे विवाद ने कार्यस्थलों पर ड्रेस कोड, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता जैसे मुद्दों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है.