बंगाल चुनाव में RSS का 'साइलेंट स्ट्राइक'! 1.75 लाख बैठकें, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, घुसपैठ और जनसांख्यिकी बदलाव को बनाया मुद्दा

Amanat Ansari 21 Apr 2026 11:31: AM 2 Mins
बंगाल चुनाव में RSS का 'साइलेंट स्ट्राइक'! 1.75 लाख बैठकें, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, घुसपैठ और जनसांख्यिकी बदलाव को बनाया मुद्दा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के लिए आरएसएस सक्रिय रूप से मैदान में उतरा है. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है और आज शाम को चुनाव प्रचार थम जाएगा. बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी अलग ही रणनीति से काम कर रहा है. आरएसएस सीधे-सीधे किसी पार्टी का प्रचार नहीं करता. इसके बजाय वह ‘लोक मत परिष्कार’ नाम से एक खास अभियान चला रहा है.

इसमें चार-पांच स्वयंसेवक मिलकर छोटी-छोटी टीम बनाते हैं और घर-घर जाकर लोगों से बात करते हैं. ये मुलाकातें आमतौर पर ड्राइंग रूम में ही होती हैं. दिल्ली चुनाव के दौरान भी संघ ने इसी तरीके की सैकड़ों बैठकें की थीं. इन छोटी बैठकें का मकसद सिर्फ वोट मांगना नहीं, बल्कि लोगों की सोच को सही दिशा देना है.

अभी तक 250 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.75 लाख ऐसी बैठकें हो चुकी हैं. स्वयंसेवक हर घर पहुंचकर लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे डर-भय या किसी के चक्कर में पड़े बिना खुलकर वोट दें. उन्हें नोटा बटन दबाने से रोक रहे हैं और पूरे राज्य में शत-प्रतिशत मतदान की अपील कर रहे हैं. साथ ही हर घर पर्चे बांटे जा रहे हैं जिनमें बंगाल के सबसे बड़े मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी गई है.

संघ के कार्यकर्ता मुख्य रूप से इन मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं...

  • महिला सुरक्षा: आरजी कर मामले के बाद यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ वादा किया है कि बीजेपी सरकार बनते ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘दुर्गा ब्रिगेड’ बनाई जाएगी. साथ ही संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पास न होने और तृणमूल कांग्रेस द्वारा इसके खिलाफ वोट देने का भी जिक्र किया जा रहा है.
  • भ्रष्टाचार: शारदा घोटाले और टीचर भर्ती घोटाले को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोल रहे हैं. आरएसएस से जुड़े शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) के लोग खासतौर पर टीचर भर्ती में हो रहे भ्रष्टाचार की पूरी डिटेल बता रहे हैं.
  • घुसपैठ और जनसांख्यिकी बदलाव: राज्य में अवैध घुसपैठ को हिंदुओं की सुरक्षा से जोड़कर उठाया जा रहा है. कार्यकर्ता लोगों को समझा रहे हैं कि बंगाल की जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है, जो आने वाले दिनों में बहुत खतरनाक साबित हो सकती है.

बैठकों के अलावा स्वयंसेवक जमीन पर हालात का जायजा भी ले रहे हैं. वे अपनी मजबूत नेटवर्किंग का फायदा उठाकर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गतिविधियों की जानकारी जुटा रहे हैं. संभावित हिंसा, बूथ कैप्चरिंग या दूसरे गड़बड़झालों की खबरें भी ऊपर तक पहुंचा रहे हैं. हर घर से संपर्क करते समय लोगों के मोबाइल नंबर भी नोट कर रहे हैं ताकि बाद में फॉलो-अप किया जा सके.

इसके साथ ही संघ ने राज्य के बड़े-बड़े हिंदू धार्मिक संगठनों, आश्रमों और सांस्कृतिक संस्थाओं से भी लगातार संपर्क बनाए रखा है. संघ की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर इन संगठनों के साथ समन्वय और भी तेज कर दिया गया है. कुल मिलाकर आरएसएस इस बार बंगाल में सिर्फ वोट मांगने नहीं, बल्कि लोगों की सोच को बदलने और उन्हें जागरूक करने का काम कर रहा है.

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