लखनऊ: अवैध धर्मांतरण से जुड़े बहुचर्चित मामले में छांगुर बाबा जेल में चक्की पिसेंगे. लखनऊ की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा समेत आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. कोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले में 2 मई से गवाही की प्रक्रिया शुरू होगी. इस केस में जिन लोगों पर आरोप तय हुए हैं, उनमें जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, नीतू उर्फ नसरीन, सबरोज, शहाबुद्दीन, रशीद, राजेश कुमार उपाध्याय, नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन और महबूब शामिल हैं. सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है और मुकदमे के दौरान अपनी बात रखने की मांग की है.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरा मामला विदेशी फंडिंग के जरिए धन जुटाकर कथित तौर पर लालच और भय दिखाकर गैर-मुस्लिमों का अवैध धर्मांतरण कराने से जुड़ा है. जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों ने एक संगठित गिरोह के रूप में काम करते हुए धर्म परिवर्तन को बढ़ावा दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपियों की गतिविधियां केवल धर्मांतरण तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इनके पीछे व्यापक साजिश के संकेत मिलते हैं. अदालत ने यह भी माना कि इस नेटवर्क का उद्देश्य धर्मांतरण के जरिए जनसंख्या संतुलन को प्रभावित करना और सामाजिक वैमनस्य फैलाना हो सकता है.
साथ ही, कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि आरोपियों के कृत्य देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ साजिश के दायरे में आते हैं. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इन गतिविधियों से दो समुदायों के बीच धर्म के आधार पर घृणा और तनाव बढ़ाने की कोशिश की गई. इस मामले में आरोपियों पर धोखाधड़ी, साजिश, छेड़खानी, गैंगरेप, अवैध धर्मांतरण और एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं.
गौरतलब है कि इस पूरे मामले की शुरुआत 16 नवंबर 2024 को हुई थी, जब एटीएस ने गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी. अब कोर्ट में सुनवाई के अगले चरण के तहत गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे मामले की दिशा और स्पष्ट होगी.