Strait of Malacca Toll: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव के बीच इंडोनेशिया से आई एक टिप्पणी ने एशिया के अहम समुद्री मार्ग मलक्का स्ट्रेट को लेकर नई बहस छेड़ दी. देश के वित्त मंत्री पुरबाया युधी सदेवा ने हाल ही में कहा था कि मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाकर राजस्व कमाया जा सकता है. उनके इस बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि क्या इंडोनेशिया भी ईरान की तरह रणनीतिक समुद्री रास्तों से शुल्क वसूलने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है.
हालांकि, विवाद बढ़ने पर इंडोनेशिया सरकार ने तुरंत स्थिति स्पष्ट की. वित्त मंत्री ने साफ कहा कि मलक्का स्ट्रेट पर किसी भी तरह का टोल लगाने की कोई योजना नहीं है. इससे पहले देश के विदेश मंत्री भी यही बात दोहरा चुके थे. उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडोनेशिया संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के नियमों का पालन करता रहेगा, जो अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खुले मार्ग सुनिश्चित करते हैं.
दरअसल, मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है. दुनिया के करीब 20% तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए किसी भी व्यवधान का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है.
इसी पृष्ठभूमि में मलक्का स्ट्रेट की अहमियत और बढ़ जाती है. लगभग 900 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग एशिया को यूरोप से जोड़ने वाला सबसे छोटा रास्ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त ऑयल ट्रांजिट मार्गों में गिना जाता है. साल 2025 में यहां से एक लाख से अधिक जहाज गुजरे, जो इसके बढ़ते सामरिक और आर्थिक महत्व को दर्शाता है.
फिलहाल इंडोनेशिया ने स्पष्ट कर दिया है कि मलक्का स्ट्रेट पर टोल लगाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए ऐसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर भविष्य में नीतिगत बहस जारी रह सकती है.