वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने एशियाई देशों से आयात होने वाले सोलर उत्पादों पर सख्ती बढ़ाते हुए भारत समेत कुछ देशों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की घोषणा की है. इस कदम का असर भारतीय सोलर कंपनियों पर तुरंत दिखाई दिया और बाजार में उनके शेयर दबाव में आ गए.
United States के वाणिज्य विभाग ने शुरुआती जांच के आधार पर माना है कि भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर सेल और मॉड्यूल अमेरिकी बाजार में बेहद कम कीमत पर बेचे जा रहे थे, जिससे वहां के घरेलू निर्माताओं को नुकसान हो रहा है. इसी वजह से इन आयातों पर भारी शुल्क लगाने का फैसला लिया गया है.
प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत से आने वाले सोलर उत्पादों पर करीब 123% तक की ड्यूटी प्रस्तावित की गई है. वहीं इंडोनेशिया और लाओस के लिए भी क्रमशः लगभग 35% और 22% के आसपास शुल्क तय किया गया है. यह कदम पिछले कई वर्षों से एशियाई देशों पर लगाए जा रहे ट्रेड प्रतिबंधों की कड़ी का ही हिस्सा माना जा रहा है.
इस फैसले के बाद भारतीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली. Waaree Energies के शेयर लगभग 4% तक फिसल गए, जबकि Vikram Solar और Indosolar में भी कमजोरी दर्ज की गई.
अमेरिकी उद्योग समूह Alliance for American Solar Manufacturing and Trade ने सरकार के सामने शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप था कि विदेशी कंपनियां सोलर उत्पादों को जानबूझकर कम कीमत पर बेचकर अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा रही हैं. शुरुआती जांच में इस दावे को सही माना गया है.
ट्रेड आंकड़ों के अनुसार, बीते साल इन तीन देशों से अमेरिका में करीब 4.5 अरब डॉलर के सोलर उत्पाद पहुंचे, जो कुल आयात का बड़ा हिस्सा थे. ऐसे में यह फैसला उन निर्यातकों के लिए झटका है जो तेजी से बढ़ते अमेरिकी बाजार पर निर्भर थे.
आगे की प्रक्रिया में, भारत और इंडोनेशिया से जुड़े मामलों पर अंतिम फैसला जुलाई के आसपास आने की संभावना है, जबकि लाओस से जुड़े आयात पर निर्णय सितंबर के आसपास लिया जा सकता है.