नई दिल्ली : भारत के 140 करोड़ लोगों के लिए संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के नई दिल्ली घोषणापत्र में भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया गया है. खास बात यह है कि चीन और रूस ने भी भारत के UNSC में अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व की मांग का समर्थन दोहराया है.
हालांकि यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि चीन ने अभी यह नहीं कहा है कि भारत को तुरंत वीटो पावर के साथ स्थायी सदस्य बना दिया जाए. BRICS घोषणा में UNSC में व्यापक सुधार और भारत-ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया गया है. स्थायी सदस्यता के लिए अभी संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सहमति और प्रक्रिया पूरी होना बाकी है.
फिलहाल UNSC में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 5 स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस हैं. इन पांचों के पास वीटो पावर है. अगर भविष्य में भारत स्थायी सदस्य बनता है और उसे वीटो अधिकार भी मिलता है, तो वैश्विक राजनीति में भारत की ताकत कई गुना बढ़ सकती है.
युद्ध, आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, प्रतिबंध और वैश्विक संकट जैसे बड़े मुद्दों पर भारत सीधे फैसले लेने वाली सबसे शक्तिशाली मेज पर होगा, इससे ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज भी मजबूत हो सकती है. भारत लंबे समय से UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है.
भारत का तर्क है कि आज की दुनिया की वास्तविक राजनीतिक और आर्थिक ताकत को देखते हुए 1945 की संरचना पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देती. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत सिर्फ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था और बड़ी आबादी वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के सबसे अहम फैसलों में स्थायी भूमिका निभाने वाला देश बन जाएगा.फिलहाल चीन का समर्थन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत जरूर है, लेकिन इसे भारत की स्थायी सदस्यता की अंतिम मंजूरी समझना जल्दबाजी होगी.