लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों के लिए राहत और खुशखबरी भरी खबर सामने आई है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने घोषणा की है कि मानदेय वृद्धि और सेवा शर्तों को लेकर आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों की सभी प्रमुख मांगें मान ली गई हैं। अब प्रदेश के सभी पंचायत सहायकों को प्रतिमाह 9,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए मुकदमे वापस लिए जाएंगे और सेवा से हटाए गए सहायकों की ससम्मान बहाली की जाएगी।
बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि पंचायत सहायक 24 तारीख से धरने पर बैठे थे। लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से संवाद किया और पाया कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की। राजभर ने कहा, "हम पहले 8,000 रुपये की बात कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री से सकारात्मक वार्ता के बाद मानदेय बढ़ाकर सीधे 9,000 रुपये महीना करने का निर्णय लिया गया है।"
वेतन वृद्धि के साथ-साथ सरकार ने पंचायत सहायकों को स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा तोहफा भी दिया है। मंत्री ने बताया कि प्रत्येक पंचायत सहायक के परिवार को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। वहीं, आंदोलन के दौरान जिन कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई या एफआईआर दर्ज हुई थी, वे सभी कानूनी मुकदमे शासन द्वारा वापस लिए जाएंगे और बर्खास्त कर्मियों को दोबारा पद पर बहाल किया जाएगा।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों, सेवा वितरण के विकेंद्रीकरण और ग्रामीण जनता की सहूलियत के लिए पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-सह-डेटा एंट्री ऑपरेटरों की तैनाती की थी। लंबे समय से ये कर्मी मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार के इस ताजा फैसले के बाद आंदोलनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
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