लखनऊ: नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने वाली रोहिणी घावरी स्विट्जरलैंड में छह साल का लंबा समय बिताने के बाद भारत लौट आई हैं। स्वदेश वापसी के बाद से ही वह दिल्ली और मेरठ में लगातार विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं। इसी क्रम में मंगलवार को वह लखनऊ पहुंचीं, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। इस सियासी मुलाकात के दौरान उनके साथ करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पाल सिंह अम्मू भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
15 सितंबर को मंत्री ओपी राजभर के जन्मदिन के मौके पर हुई इस भेंट को महज शिष्टाचार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे दलित और पिछड़ा वर्ग की सियासत के नए समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के दौरान रोहिणी ने आरक्षण के वर्गीकरण (उप-वर्गीकरण) का मुद्दा उठाया, जिसका करणी सेना के रुख के साथ तालमेल और ओपी राजभर के बयानों से सीधा जुड़ाव नजर आता है। राजभर खुद अपनी जनसभाओं में आरक्षण वर्गीकरण की मांग प्रमुखता से उठाते रहे हैं।
बातचीत के दौरान रोहिणी घावरी ने सांसद चंद्रशेखर आजाद पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर केवल एक वर्ग विशेष के नेता बनकर सिमट गए हैं और सर्वसमाज ने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया। रोहिणी ने तंज कसते हुए कहा कि चंद्रशेखर उनके बढ़ते प्रभाव से जलन रखते हैं और वह कतई नेतृत्व के लायक नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति शोषणकारी हो, वह कभी दलितों का सच्चा मसीहा नहीं हो सकता।
रोहिणी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वाल्मीकि समाज और वंचित वर्ग की अनदेखी करके कोई भी दल सत्ता तक नहीं पहुंच सकता। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में वह अन्य राजनीतिक दलों से भी संवाद स्थापित कर सकती हैं। अपने ऊपर हुए कथित अन्याय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश ने उनकी आपबीती देखी है और अब उन्हें कोर्ट की अगली तारीख का इंतजार है, जिसके जरिए चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय कराई जाएगी।