यहां समझे हीट वेव के कारण और बचने के उपाय

Global Bharat 31 May 2024 04:21: PM 2 Mins
यहां समझे हीट वेव के कारण और बचने के उपाय

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पूरा उत्तर भारत और मध्य भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है. कई स्थानों पर पारा 50 के पार पहुंच गया है. हालांकि बुधवार को दिल्ली एनसीआर में बारिश जरूर हुई, लेकिन यह बारिश लोगों को छन भर के लिए ही राहत दे सकी, उल्टा उमस बढ़ गया. दिल्ली सहित कई राज्यों में हीट वेव का अलर्ट अभी भी जारी है. आलम यह है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में भी भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि ये राज्य अमूमन ठंडे प्रदेशों में गिने जाते हैं.

इन दिनों क्यों हो रही हीट वेव की चर्चा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, वर्तमान में तीव्र हीटवेव का सामना कर रहा है, राज्य भर के अधिकांश निगरानी केंद्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक देखा गया है. हालांकि केरल में दो दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दिया है, लेकिन दिल्ली वालों को राहत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है. अनुमान है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून 27 जून तक आ जाएगा. वहीं अगर राज्य में ऐसी ही गर्मी पड़ती रही तो स्थिति भयावह हो सकती है.

हीटवेव के कारण?

  • ग्लोबल वार्मिंग: यह भारत में हीटवेव के प्राथमिक कारणों में से एक है जो मानव गतिविधियों जैसे कि जीवाश्म ईंधन जलाने, वनों की कटाई और औद्योगिक गतिविधियों के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में दीर्घकालिक वृद्धि को संदर्भित करता है. ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप उच्च तापमान और मौसम के पैटर्न में बदलाव हो सकता है, जिससे हीटवेव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
  • शहरीकरण: तेज़ी से शहरीकरण और शहरों में कंक्रीट संरचनाओं की वृद्धि "नगरीय ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect)" के रूप में जानी जाने वाली घटनाओं को जन्म दे सकता है. उच्च जनसंख्या घनत्त्व वाले शहरी क्षेत्र, इमारतें और कंक्रीट की सतह अधिक गर्मी को अवशोषित करती है तथा ऊष्मा को बनाए रखती है जिस कारण हीटवेव के दौरान तापमान उच्च होता है.
  • अल नीनो प्रभाव: अल नीनो घटना के दौरान प्रशांत महासागर का गर्म होना वैश्विक मौसम प्रतिरूप को प्रभावित कर सकता है. जिससे विश्व भर में तापमान, वर्षा और वायु के पैटर्न में बदलाव हो सकता है.

कैसे बच सकते हैं

विशेषज्ञों का मानन है कि शहर प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कई डिग्री अधिक गर्म होते हैं, क्योंकि कंक्रीट और इमारतें काफी गर्म होती हैं. कंक्रीट और इमारतें छाया और नमी को कम करती हैं जो अन्यथा जंगल में मौजूद होती हैं. बता दें कि जब सूरज की रोशनी सूखे, खुले शहर के ब्लॉक पर पड़ती है, तो वह ब्लॉक गीली, छायादार सतह की तुलना में गर्मी को अधिक आसानी से अवशोषित करता है.

पेड़ लगाना है जरूरी

वहीं पेड़ों की छतरी इस प्रभाव का मुकाबला कर सकती है, छाया प्रदान करके कंक्रीट की गर्मी को बनाए रखने की क्षमता को कम कर सकती है. इसके अतिरिक्त, पेड़ पक्की सतहों की तुलना में नमी को अधिक आसानी से अवशोषित करते हैं. पेड़ अपनी जड़ों के माध्यम से पानी को अवशोषित करते हैं और इसे अपनी पत्तियों के माध्यम से छोड़ते हैं (इस प्रक्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है), जो हवा को भी ठंडा करता है. ऐसे में हम पेड़ लगाकर ही गर्मी को कम कर सकते हैं.

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