राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पूरा उत्तर भारत और मध्य भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है. कई स्थानों पर पारा 50 के पार पहुंच गया है. हालांकि बुधवार को दिल्ली एनसीआर में बारिश जरूर हुई, लेकिन यह बारिश लोगों को छन भर के लिए ही राहत दे सकी, उल्टा उमस बढ़ गया. दिल्ली सहित कई राज्यों में हीट वेव का अलर्ट अभी भी जारी है. आलम यह है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में भी भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि ये राज्य अमूमन ठंडे प्रदेशों में गिने जाते हैं.
इन दिनों क्यों हो रही हीट वेव की चर्चा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, वर्तमान में तीव्र हीटवेव का सामना कर रहा है, राज्य भर के अधिकांश निगरानी केंद्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक देखा गया है. हालांकि केरल में दो दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दिया है, लेकिन दिल्ली वालों को राहत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है. अनुमान है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून 27 जून तक आ जाएगा. वहीं अगर राज्य में ऐसी ही गर्मी पड़ती रही तो स्थिति भयावह हो सकती है.
हीटवेव के कारण?
कैसे बच सकते हैं
विशेषज्ञों का मानन है कि शहर प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कई डिग्री अधिक गर्म होते हैं, क्योंकि कंक्रीट और इमारतें काफी गर्म होती हैं. कंक्रीट और इमारतें छाया और नमी को कम करती हैं जो अन्यथा जंगल में मौजूद होती हैं. बता दें कि जब सूरज की रोशनी सूखे, खुले शहर के ब्लॉक पर पड़ती है, तो वह ब्लॉक गीली, छायादार सतह की तुलना में गर्मी को अधिक आसानी से अवशोषित करता है.
पेड़ लगाना है जरूरी
वहीं पेड़ों की छतरी इस प्रभाव का मुकाबला कर सकती है, छाया प्रदान करके कंक्रीट की गर्मी को बनाए रखने की क्षमता को कम कर सकती है. इसके अतिरिक्त, पेड़ पक्की सतहों की तुलना में नमी को अधिक आसानी से अवशोषित करते हैं. पेड़ अपनी जड़ों के माध्यम से पानी को अवशोषित करते हैं और इसे अपनी पत्तियों के माध्यम से छोड़ते हैं (इस प्रक्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है), जो हवा को भी ठंडा करता है. ऐसे में हम पेड़ लगाकर ही गर्मी को कम कर सकते हैं.