पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं उन्हें देखकर ये कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि कुछ शरारती तत्वों ने रंग में भंग डालने की कोशिश की है. कुछ लोगों ने जानबूझ कर माहौल बिगाड़ने की साजिश रची है. धार्मिक उत्सव को खराब करने की कोशिश की है. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में रामनवमी जुलुस के दौरान झड़पें हुईं. इस घटना में 20 लोग घायल हो गए. यह घटना शक्तिपुर इलाके में उस समय हुई जब रामनवमी पर शोभायात्रा निकाली जा रही थी. इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इलाके के वीडियो में लोग अपनी छतों से जुलूस पर पथराव करते दिख रहे हैं. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े.
अब पुलिस इस घटना की जांच कर रही है. पुलिस जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर इस घटना को क्यों और कैसे अंजाम दिया गया. किसके इशारे पर इस घटना को अंजाम दिया गया है. कौन है जो चुनाव के बीच में देश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है. कौन है जो दो समुदायों को आपस में भिड़ाना चाहता है. एक तरफ अयोध्या में भगवन राम का सूर्यतिलक हो रहा था दूसरी तरफ बंगाल में ऐसी झड़प हुई. तो क्या अयोध्या में इतने धूमधाम से हो रहा कार्यक्रम को खराब करने की कोशिश की जा रही थी. कौन है जिसे ये कार्यक्रम पसंद नहीं आ रहा था. जांच तो चल रही है लेकिन इस मामले ने चुनाव के बीच में राज्य का सियासी पारा गरमा दिया है. बीजेपी और कांग्रेस राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर हमलावर हो गई है. यानी ममता सरकार बुरी तरह घिर गई हैं. बीजेपी ने तो ममता सरकार की पुलिस पर ही सवाल उठा दिए.
बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पिछले साल की तरह जब ममता पुलिस की मंशा में कमी के कारण दलखोला, रिशरा और सेरामपुर में राम नवमी जुलूस पर हमला हुआ. इस साल भी ममता पुलिस राम भक्तों की रक्षा करने में विफल रही. बीजेपी नेता यहीं नहीं रुके हैं उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि इस घटना में ममता पुलिस भी उपद्रवियों के साथ मिल गई और राम भक्तों पर आंसू गैस के गोले दागे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जुलूस अचानक खत्म हो जाए. इतना ही नहीं, ममता पुलिस उपद्रवियों को माणिक्यहार मोड़ पर सनातनी समुदाय की दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट करने से भी नहीं रोक सकी. यह ममता बनर्जी के उकसावे का ही नतीजा है. पश्चिम बंगाल में धार्मिक त्योहारों के शांतिपूर्ण और घटना मुक्त उत्सव के लिए राज्य सरकार को बदल देना चाहिए.
अब सवाल ये भी है कि आखिर ममता बनर्जी और उनकी पुलिस पर इतने गंभीर आरोप क्यों लग रहे हैं. इसकी वजह उनका ही एक बयान भी है. दरअसल जब इलेक्शन कमीशन ने डीआईजी को हटाने का ऐलान किया था. उसके बाद ही बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में रामनवमी पर माहौल खराब होने की चेतावनी दी थी. ममता बनर्जी ने कहा था कि सिर्फ बीजेपी के निर्देश पर मुर्शिदाबाद के DIG को बदल दिया गया. अब, अगर मुर्शिदाबाद और मालदा में कोई घटना होती है, तो जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी. हालांकि उन्होंने बीजेपी पर ही आरोप लगाया था कि बीजेपी ही पुलिस अधिकारियों को बदलना चाहती है जिससे ऐसी घटना को अंजाम दे सके. और यही बयान देकर ममता बनर्जी घिर गई नतीजा पूरी बीजेपी ने उन्हें घेर लिया है. विवाद हुआ है तो आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो चलेगा. लेकिन ये सवाल बहुत बड़ा है कि आखिर कौन है इस घटना के पीछे?