नई दिल्ली: केंद्र सरकार इस महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार सरकार को विश्वास है कि उसके पास परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को लोकसभा में पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल है. इस बीच सरकार द्रमुक और कुछ छोटी विपक्षी पार्टियों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है.
शीर्ष सरकारी सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि केंद्र को सदन में अपनी ताकत पर भरोसा है और वह प्रस्तावित विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. विशेष सत्र बुलाने का यह कदम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते प्रदर्शनों के बीच उठाया जा रहा है.
पहले हार का सामना कर चुकी है सरकार
अप्रैल 17 को बजट सत्र के दौरान परिसीमन और लोकसभा-विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में हार का सामना करना पड़ा था. मानसून सत्र में भी इसे लाने की उम्मीद थी, लेकिन नीट परीक्षा लीक विवाद, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और CJP आंदोलन-SIR विरोध प्रदर्शन जैसे मुद्दों के कारण इसे टाल दिया गया.
संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत (दो-तिहाई) की जरूरत होती है, जो करीब 360 सीटों के बराबर है. वर्तमान लोकसभा में 540 सदस्य हैं. NDA के पास बहुमत तो है, लेकिन दो-तिहाई से कम है. हालांकि पिछले सत्र के बाद स्थिति मजबूत हुई है. 20 तृणमूल कांग्रेस सांसद और 6 शिवसेना (यूबीटी) सांसद सत्ता पक्ष में शामिल हो चुके हैं.
द्रमुक से बातचीत जारी
सूत्रों के अनुसार केंद्र द्रमुक से समर्थन हासिल करने के लिए बातचीत कर रहा है. तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस से अलग होने और इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने के बाद द्रमुक से यह संपर्क बढ़ा है. सरकार कुछ छोटी विपक्षी पार्टियों से भी संपर्क साध रही है.
सत्र अभी प्रोरोग नहीं हुआ
मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (sine die) कर दिया गया था, लेकिन औपचारिक रूप से प्रोरोग नहीं किया गया. आमतौर पर स्थगन के 2-3 दिन बाद प्रोरोग की घोषणा होती है, लेकिन इस बार दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है. इससे सरकार को विशेष बैठक बुलाने की गुंजाइश बनी हुई है.
सूत्रों ने बताया कि विशेष बैठक से पहले एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है. तिथियां 26-27 अक्टूबर को संविधान सदन में होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को ध्यान में रखकर तय की जाएंगी. सरकार के इन प्रयासों से साफ है कि वह परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर फिर से जोर आजमाने वाली है. विपक्ष के रुख और समर्थन जुटाने की कोशिशें तय करेंगी कि यह प्रयास सफल होता है या नहीं.