नई दिल्ली: फ्लाईदुबई प्लेन 1073 कांड में चौंकाने वाली सुरक्षा चूक की कहानी सामने आई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, को-पायलट हमाम अल-हम्मामी को रोकने के तीन बड़े मौके थे, लेकिन ओमान, यूएई और इजरायल तीनों देशों की सुरक्षा व्यवस्था में चूक की वजह से वह कॉकपिट तक पहुंच गया. रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले ओमान में अलार्म बजा था.
ओमान एयर ने उसकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की तो पाया कि वह कट्टरपंथी विचारों में अत्यधिक रुचि रखता है. इसके बाद उसे उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया, डी-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम से गुजारा गया और डेस्क जॉब पर लगा दिया गया. लेकिन ओमान ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को दूसरे देशों या एयरलाइंस के साथ साझा नहीं किया. कुछ समय बाद फरवरी 2026 में फ्लाईदुबई ने उसे नौकरी पर रख लिया.
एयरलाइन ने उसकी पिछली नौकरी के बारे में ओमान एयर से संपर्क तक नहीं किया और न ही वहां उठी चिंताओं की जानकारी ली. सिर्फ क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक किया गया. नौकरी मिलने के बाद हम्मामी को संवेदनशील दुबई-तेल अवीव रूट पर तैनात कर दिया गया, जहां वह कई उड़ानें भी भर चुका था. तीसरा और आखिरी मौका इजरायल के पास था. ओमान जैसे देशों के पायलटों को वहां उड़ान भरने की अनुमति नहीं होती.
विदेशी एयरलाइंस को क्रू और यात्रियों की सूची पहले ही जमा करनी होती है. फ्लाईदुबई ने प्लेन 1073 का मैनिफेस्ट भी दिया था और यह जानकारी इजरायल के पैसेंजर डेटा सिस्टम में मौजूद थी. लेकिन इजरायल के ट्रांसपोर्टेशन मंत्रालय ने कभी इस डेटाबेस का इस्तेमाल नहीं किया. मंत्रालय का कहना है कि उसके पास विदेशी क्रू की जांच करने का अधिकार या विशेषज्ञता नहीं थी और वह इस सिस्टम को एक्सेस करना भी नहीं जानता था.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2024 में ही एक क्लासिफाइड रिपोर्ट में विदेशी एयरलाइंस की उड़ानों की सुरक्षा कमियों को लेकर चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हुआ. इस तरह एक के बाद एक मौके छूटते गए और हम्मामी प्लेन 1073 के कॉकपिट तक पहुंचने में सफल रहा. अब यूएई अधिकारी फ्लाईदुबई की हायरिंग प्रक्रिया की जांच कर रहे हैं.