वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे बड़े पैमाने के छात्र प्रदर्शनों पर तीखा रिएक्शन दिया है. उन्होंने इन प्रदर्शनों को शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं से जोड़ने के बजाय बड़े पैमाने पर प्रवासन (मास माइग्रेशन) और इस्लाम से जोड़ते हुए कहा कि यह एक समय के महान देश पर कब्जा करने की कोशिश है.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “फ्रांस में जो हो रहा है, वह बेकाबू मास माइग्रेशन के अलावा और कुछ नहीं है. यह स्कूलों की बात नहीं है, यह इस्लाम का कभी महान देश रहे फ्रांस पर कब्जा करने की मंशा की बात है.” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह प्रदर्शन उस देश पर कब्जे की कोशिश है जो कभी महान हुआ करता था.
प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई?
फ्रांस में हाई स्कूल के छात्रों ने स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, कक्षाओं की भीड़भाड़, खराब बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी को लेकर प्रदर्शन शुरू किए थे. शुरुआत में स्थानीय स्तर पर चली यह नाराजगी तेजी से पूरे देश में फैल गई. पेरिस, मार्सेय, ल्यों, लिल और स्ट्रासबर्ग समेत कई शहरों में छात्रों ने स्कूलों के गेट बंद कर दिए. प्रदर्शन कई जगहों पर हिंसक हो गए.
वाहनों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं और पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को पूरे देश में करीब ढाई लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने इस संख्या को चार लाख से ऊपर बताया.
ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को और विवादास्पद बना दिया है. वे पहले भी यूरोप की माइग्रेशन नीतियों की आलोचना करते रहे हैं और सीमाओं को सख्त करने की सलाह देते आए हैं. फ्रांस में दक्षिणपंथी दलों ने भी हिंसक घटनाओं पर चिंता जताई है. नेशनल रैली की नेता मरीन ले पेन ने हिंसा करने वालों के लिए कठोर सजा की मांग की है.
फ्रांसीसी सरकार ने प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया है. प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार है, लेकिन हिंसा और ट्रंप के बयान ने इसे अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है. यह घटनाक्रम यूरोप में माइग्रेशन, सांस्कृतिक बदलाव और आंतरिक सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को फिर से तेज कर सकता है.