लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गेहूं किसानों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी राहत दी है. इस सौगात का फायदा 3.56 लाख किसानों को होने वाला है. दरअसल गेहूं बेचने के लिए होने वाले सत्यापन प्रक्रिया में किसानों को ये राहत योगी सरकार की तरफ से दी गई है. जो नया आदेश जारी किया गया है उसमे कहा गया है कि अब यूपी में किसानों को 100 कुंतल से ज्यादा गेहूं बेचने पर सत्यापन नहीं कराना होगा. पहले के इस जरूरी नियम को योगी सरकार ने खत्म कर दिया है.
वेरिफिकेशन में दी है राहत
योगी सरकार की तरफ से जारी किये गए आदश में कहा गया है कि अब किसानों को गेहूं बेचने में किसी तरह के परेशानी या बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा. सरकार ने सत्यापन की रुकावट को पूरी तरह से खत् मकर दिया है. यही वजह है कि सीएम योगी के इस आदेश को किसानों के लिए काफी अहम माना जा रहा है. इसके साथ ही सही समय पर किसानों को लाभ भी मिल सकेगा.
किसान बेच सकेंगे अनुमानित उत्पादन से 3 गुना ज्यादा गेहूं
इस आदेश के जारी होने के बाद अब किसानों को एक और फायदा मिला है, जिसके तहत किसान अपनी फसल के अनुमानित उत्पादन से 3 गुना ज्यादा बिक्री कर सकते हैं. पुराने नियम के तहत किसानों को 100 कुंतल से अधिक गेहूं बेचने पर खाद्य विभाग से वेरिफिकेशन कराना होता था. जिसे सत्यापन प्रक्रिया कहा जाता था. ये सत्यापन कराने के बाद ही किसान सरकारी गहूं कृय केंद्र या फिर सीधे मंडी में अपना गेहूं बेच सकते थे. लेकिन अब खाद्य विभाग की तरहफ से की जाने वाली इस प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है. सराकार के इस कदम को किसानों के हित में एक और बड़ा कदम बताया जा रहा है. क्योंकि अब किसान 100 कुंतल से ज्यादा गेहूं होने पर भी कहीं भी आसान से बेच सकेंगे.
20 हजार से ज्यादा किसानों से खरीदे 1 लाख मीट्रिक टन गेहूं
सरकार इस साल गेहूं की खरीद भी रिकॉर्ड स्तर पर कर रही है. अगर अप्रैल के पहले सप्ताह में गेहूं की खरीद की बात करें तो 20 हजार से ज्यादा किसानों से 1 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदा जा चुका है. बता दें कि उत्तर प्रदेश में 3 लाख 56 हजार से ज्यादा किसानों ने क्रय केंद्रों पर गेहूं बिक्री के लिए अपना पंजीकरण कराया है.
48 घंटे में होगा किसान का भुगतान
सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने वाले किसानों के भुगतान के लिए भी योगी सरकार की तरफ से निर्देश जारी किया गया है. सरकार का साफ निर्देश है कि किसान को उसकी फसल की कीमत 48 घंटे के अंदर मिल जानी चाहिए. जिससे प्रदेश के किसी भी किसान के आर्थिक तौर पर परेशानी का सामना ना करना पड़े.