नई दिल्ली: बांदा जिले के एक युवक ने पाकिस्तान की जेल से अपने परिवार को दिल दहला देने वाला संदेश भेजा है. संदेश में उसने सिर्फ एक ही बात बार-बार लिखी, ''हमें वापस अपने देश बुला लो''. धौंसड़ गांव के रहने वाले लक्ष्मण पिछले पांच साल से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. दो दिन पहले उनके द्वारा भेजा गया व्हाट्सएप मैसेज जब घर पहुंचा, तो पूरे परिवार और गांव में सन्नाटा छा गया. आंखें नम हो गईं और उम्मीद की एक हल्की किरण भी जगी.
लक्ष्मण जुलाई 2022 में गुजरात के पोरबंदर से मछली पकड़ने निकले थे. अनजाने में नाव समुद्री सीमा पार कर पाकिस्तान के जल क्षेत्र में चली गई. वहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन्हें पकड़ लिया और जेल भेज दिया. उसके बाद लंबे समय तक परिवार को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. अब इस मैसेज में लक्ष्मण ने वहां की जेल की कठिन परिस्थितियों का जिक्र किया है.
उन्होंने पूछा है कि भारत सरकार उनकी वापसी के लिए क्या कदम उठा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने साल 2023 में ही उन्हें बरी कर दिया था और वहां की सरकार भी रिहाई के लिए तैयार है, लेकिन भारतीय पक्ष से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है. परिवार की हालत बेहद दयनीय है.
लक्ष्मण की मां बुद्दी लगातार रो रही हैं और उनकी सेहत बिगड़ गई है. पिता जागेश्वर बताते हैं कि वे पिछले कई सालों से अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं. यह सिर्फ लक्ष्मण की कहानी नहीं है. बांदा जिले के तिंदवारी क्षेत्र के जसईपुर गांव के जितेंद्र और धौंसड़ के चांद बाबू तथा शैलेंद्र भी पिछले पांच साल से पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में बंद हैं. सभी परिवार गरीब हैं और अपने बेटों की वापसी के लिए तरस रहे हैं.
स्थानीय लोगों और पूर्व राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने भी इस मामले को उठाया है. उन्होंने हाल ही में बांदा के जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर इन चारों मछुआरों की जल्द रिहाई की मांग की है. फिर भी केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है. परिवार अब सिर्फ यही उम्मीद लगाए बैठा है कि सरकार जल्द कोई कदम उठाएगी और उनके बेटे वापस घर आ सकेंगे.