अर्थशास्त्री ने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर उठाए गंभीर सवाल, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जांच की मांग 

Amanat Ansari 01 Apr 2026 08:19: PM 2 Mins
अर्थशास्त्री ने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर उठाए गंभीर सवाल, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जांच की मांग 

Andhra Pradesh Assembly Elections: आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया है कि लगभग 17 लाख वोट आधी रात के बाद डाले गए. कुछ वोट मात्र 6 सेकंड में डाले गए. ये कुछ असामान्य वोटिंग पैटर्न थे. इन चुनावों में चंद्रबाबू नायडू की TDP के नेतृत्व वाली NDA को भारी बहुमत मिला था और उसने 175 में से 164 सीटें जीती थीं.  प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर ने आरोप लगाया कि मतदान 3,500 बूथों पर रात 2 बजे तक चलता रहा, जिसका डेटा एक चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहा है.

उन्होंने बताया कि कुल वोटों में से लगभग 4.16% वोट रात 11:45 बजे से 2 बजे तक डाले गए. शाम 8 बजे से रात 2 बजे तक कुल 52 लाख वोट दर्ज किए गए, जिनमें से 17 लाख से ज्यादा वोट सिर्फ आधी रात के बाद डाले गए. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि आधी रात के बाद हर 20 सेकंड में एक वोट डाला जा रहा था.  प्रभाकर ने सवाल किया, "अगर EVM को रीसेट होने में 14 सेकंड लगते हैं, तो 6 सेकंड में वोट कैसे डाला जा रहा था? क्या कोई मतदाता इतने कम समय में अंदर आकर वोट डालकर बाहर निकल सकता है?"  उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शाम 8 बजे के बाद कुछ असामान्य हुआ था.

पहले भी उठ चुके थे सवाल

मतदान समाप्त होने के बाद (13 मई 2024 को शाम 5 बजे) आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने मीडिया को बताया कि 68.04% वोटिंग हुई है. ECI ने शाम 8 बजे जारी बयान में Voter turnout 68.12% बताया. फिर रात 11:45 बजे इसे संशोधित करके 76.50% कर दिया गया. चार दिन बाद अंतिम Voter turnout 81.79% बताई गई. प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाया.

उन्होंने पूछा कि Form 17C को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? उन्होंने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट मशीन रीडेबल फॉर्मेट में नहीं दी गई, जिससे स्वतंत्र जांच मुश्किल हो जाती है. भूषण ने कहा, "पारदर्शिता के प्रति विरोध संस्थागत समस्या को दर्शाता है. लोकतंत्र अंधेरे में नहीं चल सकता." उन्होंने विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए VVPAT पर्चियों की अनिवार्य गिनती की मांग की. साथ ही मतदान के बाद कतार में खड़े मतदाताओं का सार्वजनिक रिकॉर्ड और बूथ-लेवल डेटा की रीयल-टाइम उपलब्धता की भी मांग की.

इन सबके बीच पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी इन चिंताओं का समर्थन किया और चुनाव रिकॉर्ड्स (Form 17C और Form 20) की ऑडिट की मांग की. Form 20 रिटर्निंग अधिकारी द्वारा मतगणना के बाद तैयार किया जाने वाला अंतिम परिणाम पत्र है. कुरैशी ने सवाल किया, "अगर Form 17C बूथ स्तर पर साइन और सील हो जाता है, तो फिर एग्रीगेटेड डेटा में बाद में विसंगतियां क्यों आती हैं?" उन्होंने सुझाव दिया कि मतदान प्रतिशत उसी दिन सार्वजनिक किया जाए और बूथ-लेवल सारांश तुरंत जारी किए जाएं.

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