विरोध के बाद सरकार ने पलटा फैसला: कहा- संचार साथी ऐप अनिवार्य नहीं

Amanat Ansari 02 Dec 2025 06:09: PM 1 Mins
विरोध के बाद सरकार ने पलटा फैसला: कहा- संचार साथी ऐप अनिवार्य नहीं

नई दिल्ली: केंद्र के निर्देश के बाद गोपनीयता पर सवाल उठने और निगरानी की आशंका जताए जाने पर मंगलवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सफाई दी कि संचार साथी ऐप को एक्टिवेट करना पूरी तरह वैकल्पिक है. इसे कभी भी डिलीट किया जा सकता है. संचार मंत्री ने साफ कहा कि यह सरकारी साइबर सिक्योरिटी ऐप न तो जासूसी करता है और न ही कॉल की निगरानी करता है.

संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में सिंधिया ने कहा, “चाहें तो एक्टिवेट कर लीजिए, नहीं चाहें तो मत कीजिए... संचार साथी नहीं चाहिए तो डिलीट कर दीजिए. यह अनिवार्य बिल्कुल नहीं है, पूरी तरह वैकल्पिक है.” यह सफाई ऐसे समय आई है जब दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को सख्त निर्देश दिए थे कि...

  • नई डिवाइसों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल हो,
  • ऐप आसानी से दिखे और उसकी सुविधाएं बंद या प्रतिबंधित न की जाएं,
  • पुरानी डिवाइसों में सॉफ्टवेयर अपडेट के ज़रिए ऐप भेजा जाए.
  • कंपनियों को यह लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था.

जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ संचार साथी ऐप चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने, अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन हैं यह चेक करने और संदिग्ध धोखाधड़ी की शिकायत करने जैसी सुविधाएं देता है. हालांकि इस निर्देश से स्मार्टफोन कंपनियों के साथ तनाव पैदा हो गया और डेटा संग्रहण व यूज़र की सहमति को लेकर राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया. संसद में भी यह मुद्दा गूंजा. कांग्रेस ने तत्काल इस निर्देश को वापस लेने की मांग की.

विपक्ष ने इसे निजता का गंभीर उल्लंघन बताया. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे “जासूसी ऐप” कहा. राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे “बिग बॉस निगरानी का नया अध्याय” बताया. कई लोगों ने इसकी तुलना 2022 के पेगासस जासूसी कांड से की.

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने लिखा, “यह तो पेगासस प्लस प्लस है... बिग ब्रदर हमारे फोन और पूरी निजी ज़िंदगी पर कब्ज़ा कर लेगा.” अब सरकार के यू-टर्न के बाद यह विवाद कुछ शांत होने की उम्मीद है.

Sanchar Saathi Sanchar Saathi App Sanchar Saathi privacy

Recent News