नई दिल्ली: लाल किले के पास इजरायली दूतावास के बाहर हुए कार बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. सोमवार को एजेंसी ने कश्मीर से दूसरे मुख्य संदिग्ध को धर दबोचा. गिरफ्तार आरोपी की पहचान अनंतनाग के काजीगुंड निवासी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश के रूप में हुई है. NIA की पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी अलार्म से कम नहीं हैं.
जांच में पता चला है कि यह आतंकी मॉड्यूल हमास और ISIS की तरह भारत में भी ड्रोन आतंकवाद शुरू करने की पूरी तैयारी कर चुका था. आरोपी ड्रोन को हथियार बनाने के लिए उसे पूरी तरह मॉडिफाई कर रहे थे और छोटे लेकिन घातक रॉकेट भी तैयार कर रहे थे. जांच अधिकारियों के अनुसार, इन ड्रोनों में हाई-रेजोल्यूशन कैमरा, लंबी उड़ान वाली बैटरी और विस्फोटक भरने की क्षमता जोड़ी जा रही थी.
योजना थी कि भीड़-भाड़ वाली जगहों, खासकर दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में एक साथ कई जगहों पर सीरियल ब्लास्ट किए जाएं. इन ड्रोनों को दूर बैठकर रिमोट से कंट्रोल कर टारगेट पर गिराया जाना था. बिल्कुल वही तरीका जो हमास गाजा में और ISIS सीरिया-इराक में इस्तेमाल करता रहा है. गिरफ्तार दानिश आत्मघाती हमलावर उमर का करीबी सहयोगी था और तकनीकी विशेषज्ञ की भूमिका निभा रहा था.
उसने श्रीनगर और अनंतनाग में छिपकर ड्रोन में बदलाव और रॉकेट बनाने का काम शुरू कर रखा था. NIA की टीम ने कश्मीर में छापेमारी कर उसके ठिकानों से कई आपत्तिजनक सामान और डिजिटल सबूत बरामद किए हैं. अधिकारियों का कहना है कि अगर दिल्ली में कार बम धमाका न हुआ होता और इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ न हुआ होता, तो आने वाले दिनों में देश कई बड़े और घातक ड्रोन हमलों का गवाह बन सकता था.
अभी जांच जारी है और NIA को उम्मीद है कि मॉड्यूल के बाकी सदस्य और फंडिंग के स्रोत जल्द बेनकाब हो जाएंगे. देश में ड्रोन से आतंकवाद की यह पहली कोशिश सुरक्षा एजेंसियों के लिए नया खतरा बनकर उभरी है. अब ड्रोन टेक्नोलॉजी पर निगरानी और काउंटर-मेजर्स को और सख्त करने की तैयारी शुरू हो गई है. पूरी घटना की सुरक्षा एजेंसियां गहनता से जांच कहरने में जुटी हुई है.