नई दिल्ली: भारत में बढ़ती गर्मी अब एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. हर साल लाखों लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं और सैकड़ों की मौत भी हो रही है. इसे अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जा रहा है क्योंकि यह धीरे-धीरे लेकिन लगातार नुकसान पहुंचा रहा है. मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 2025 भारत का आठवां सबसे गर्म साल रहा.
1901 से अब तक के सबसे गर्म 15 सालों में से 10 साल पिछले 15 वर्षों (2011-2025) के हैं. 2016 से 2025 तक का दशक अब तक का सबसे गर्म दशक साबित हुआ है. 2025 में देश का औसत सतही तापमान सामान्य से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा, जबकि 2024 में यह बढ़ोतरी 0.65 डिग्री तक पहुंच गई थी. खास बात यह है कि सर्दियों में भी तापमान बढ़ रहा है.
2025 में जनवरी-फरवरी में औसत तापमान 1.17 डिग्री ऊपर रहा. प्री-मॉनसून और मॉनसून सीजन में भी तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया गया. यानी गर्मी अब सिर्फ गर्मियों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि साल भर महसूस की जा रही है.
भयंकर गर्मी का खतरा कितने लोगों पर?
एक हालिया रिपोर्ट (CEEW) के अनुसार, देश के कुल 734 जिलों में से 417 जिलों (करीब 57%) पर अत्यधिक गर्मी का खतरा मंडरा रहा है. इन जिलों में देश की 76% आबादी रहती है. यानी हर चार भारतीयों में से तीन पर भयंकर गर्मी का खतरा है. इस खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं – दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और गोवा रहेगा.
गर्म रातें बढ़ रही हैं, ठंडक मिलना मुश्किल
पिछले एक दशक में गर्म दिनों की तुलना में गर्म रातों की संख्या ज्यादा तेजी से बढ़ी है. करीब 70% जिलों में यह ट्रेंड देखा गया. गर्म रातें खासतौर पर खतरनाक हैं क्योंकि दिन की गर्मी से शरीर को आराम और ठंडक मिलने का मौका नहीं मिलता. बड़े शहर अब 'अर्बन हीट आइलैंड' बन चुके हैं. कंक्रीट की इमारतें, सड़कें और छतें दिन भर गर्मी सोख लेती हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ती हैं, जिससे रात की गर्मी और बढ़ जाती है.
उमस के साथ गर्मी और घातक
गर्मी के साथ बढ़ती उमस शरीर के लिए और भी मुश्किल बना रही है. जब हवा में नमी ज्यादा होती है तो पसीना सूख नहीं पाता और शरीर ठंडा नहीं हो पाता. इससे 'हीट स्ट्रेस' की स्थिति बनती है. हीटवेव की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. 2023 में अप्रैल-जून के बीच पूरे देश में 111 हीटवेव वाले दिन थे, जो 2024 में बढ़कर 205 हो गए. दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह संख्या कई गुना बढ़ी है.
मौतों का आंकड़ा
गर्मी अब जानलेवा साबित हो रही है. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक:
2021 में हीटवेव/हीटस्ट्रोक से 374 मौतें
2022 में 730 मौतें
2023 में 804 मौतें
बता दें कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है. गर्मी अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ा स्वास्थ्य और जीवन का खतरा बन चुकी है. शहरीकरण, कंक्रीट निर्माण और ग्लोबल वार्मिंग मिलकर इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं. लोगों को जागरूक होना जरूरी है – दोपहर में बाहर निकलने से बचना, ज्यादा पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और कमजोर लोगों (बुजुर्ग, बच्चे, बीमार) का खास ख्याल रखना.
सरकार और स्थानीय प्रशासन को भी शहरी नियोजन, हरित क्षेत्र बढ़ाने और हीट एक्शन प्लान को मजबूत करने की जरूरत है. अगर यही स्थिति रही तो आने वाले सालों में गर्मी का यह 'साइलेंट किलर' और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है. ये आंकड़े सिर्फ दर्ज मामलों के हैं, वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है.