नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिंसा के सिलसिले में 12 और लोगों को गिरफ्ता किया गया है, जिसके बाद कुल गिरफ्तार लोगों की संख्या 150 से अधिक हो गई. वहीं, BSF की पांच कंपनियां तैनात किए जाने के बाद से अब तक हिंसा की कोई नई घटना नहीं घटी है. इस बीच, भाजपा ने दावा किया कि तनाव के बाद 400 से ज्यादा हिंदुओं को अपने घरों से भागने पर मजबूर होना पड़ा है. इसे लेकर भाजपा सहित विपक्ष के अन्य लोग राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर रहे हैं.
बता दें कि मुर्शिदाबाद में BSF को तैनात करने वाला कदम कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया है. आईजी साउथ बंगाल फ्रंटियर करणी सिंह शेखावत ने कहा कि क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए राज्य पुलिस के साथ समन्वय करेगी.. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर और बल जोड़े जाएंगे. उन्होंने कहा, "हमें इस स्थिति में उनके साथ मिलकर काम करना होगा. हमने पुलिस की मदद के लिए अपनी पांच कंपनियां भेजी हैं. हम यहां पुलिस की मदद करने आए हैं, स्वतंत्र कार्रवाई के लिए नहीं. हम राज्य पुलिस की मांग के अनुसार काम करेंगे. हमें उम्मीद है कि यहां जल्द ही शांति बहाल हो जाएगी. अगर पुलिस को और कंपनियों की जरूरत होगी तो हम मुहैया कराएंगे. बीएसएफ हर स्थिति के लिए तैयार है."
बता दें कि पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद में संशोधित वक्फ कानून के मद्देनजर हिंसा भड़क उठी थी. इस वजह से कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई और 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया. इस बीच, पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर छापेमारी की गई. इससे पहले शुक्रवार को कई वाहनों में आग लगा दी गई और सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया. मालदा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण 24 परगना समेत कई जिलों में हिंसा भड़क उठी. सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि हिंसा के बाद मुर्शिदाबाद से हिंदू 'भागने को मजबूर' हुए.
भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि हिंसा के बाद 400 से ज़्यादा लोगों को अपने घरों से "भागने को मजबूर" होना पड़ा है. भाजपा नेता ने इलाके से तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किए, जिसमें विस्थापित लोगों के इंटरव्यू भी शामिल हैं. एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसके घर में आग लगा दी गई है, जबकि उसने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने कार्रवाई नहीं की और भाग गए.
प्रभावित क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने रविवार को कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं और सुरक्षा बल मुख्य सड़कों पर वाहनों की जांच कर रहे हैं और संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रहे हैं.
सीएम ने बुलाई बैठक
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुस्लिम समुदाय को शांत करने के लिए बैठक बुलाई है. सौगत रॉय ने कहा, "ममता बनर्जी बंगाल के लोगों की नेता हैं. उन्हें पता है कि बंगाल को कैसे चलाना है. यहां भाजपा के लिए कोई जगह नहीं है. लोग वक्फ संशोधन विधेयक से नाखुश हैं, इसलिए मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय को शांत करने के लिए बैठक बुलाई है. वक्फ विधेयक को लेकर लोगों की भावनाएं भड़की हुई हैं. यह प्रतिक्रिया स्वतःस्फूर्त थी."
सीमावर्ती जिलों को 'अशांत क्षेत्र' घोषित करने का अनुरोध
उधर पश्चिम बंगाल से भाजपा के लोकसभा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर उनसे पश्चिम बंगाल के चुनिंदा सीमावर्ती जिलों को AFSPA के तहत 'अशांत क्षेत्र' घोषित करने का अनुरोध किया.
हिंसा पर राजनीतिक तूफान
तनाव के बीच, राजनीतिक तूफान तब शुरू हुआ जब भाजपा ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार स्थिति को संभालने में "अक्षम" है. भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "यह ज्ञात हो कि यह विरोध का कार्य नहीं था, बल्कि हिंसा का एक पूर्व नियोजित कार्य था, जिहादी ताकतों द्वारा लोकतंत्र और शासन पर हमला था, जो अपने प्रभुत्व का दावा करने और हमारे समाज के अन्य समुदायों में भय फैलाने के लिए अराजकता फैलाना चाहते हैं." उन्होंने कहा, "सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट कर दिया गया, सरकारी अधिकारियों को धमकी दी गई, और भय और धमकी का माहौल बनाया गया, यह सब असहमति की झूठी आड़ में किया गया. ममता बनर्जी सरकार की चुप्पी बहरा करने वाली है."