नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों का सिलसिला जारी है. हाल ही में तुर्कमान गेट के निकट फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाने के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी. एमसीडी की टीम ने हाईकोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की, जिसमें करीब 36 हजार वर्ग फुट सरकारी जमीन को मुक्त कराया गया. इसमें अवैध बारातघर और डिस्पेंसरी जैसी संरचनाएं ध्वस्त की गईं.
कार्रवाई के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने अफवाह फैलाकर भीड़ इकट्ठा की और पुलिस पर पथराव किया, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए. पुलिस ने हल्का आंसू गैस का इस्तेमाल कर स्थिति नियंत्रित की. अब तक सीसीटीवी फुटेज और ड्रोन की मदद से करीब 30-35 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से कई को हिरासत में लिया गया है. मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच जारी है. सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के एक सांसद मोहिबुल्लाह नदवी की मौजूदगी और भूमिका की भी जांच हो रही है, हालांकि उनकी संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है.
इसी क्रम में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नया निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने एमसीडी को ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के आसपास के इलाके में अवैध अतिक्रमण का सर्वे करने का आदेश दिया है. विशेष रूप से सार्वजनिक पार्कों, सड़कों और सरकारी जमीनों पर हुए कब्जों पर फोकस करने को कहा गया है. यह निर्देश पुरानी दिल्ली के एक निवासी फरहत हसन की याचिका पर आया, जिसमें अवैध पार्किंग, फेरीवालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक सुविधाओं में बाधा की शिकायत की गई थी.
एमसीडी को दो महीने के अंदर सर्वे पूरा कर कोर्ट में रिपोर्ट जमा करनी है. अगर रिपोर्ट में अवैध निर्माण या अतिक्रमण पाया जाता है, तो कोर्ट के अनुसार कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल हो सकता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कोई निर्माण गैरकानूनी साबित होता है, तो कानून अपना काम करेगा. यह कार्रवाई फैज-ए-इलाही मस्जिद मामले के बाद आई है, जहां पहले से ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.
प्रशासन का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों से पहले स्थानीय लोगों को नोटिस दिए गए थे और धार्मिक स्थलों को नुकसान न पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था. फिर भी अफवाहों के कारण कुछ जगहों पर तनाव पैदा हुआ. दिल्ली पुलिस अब सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है.