Monsoon 2025: भारत में मानसून का इंतजार हर साल बड़ी बेसब्री से किया जाता है क्योंकि यह देश की कृषि और जल प्रबंधन के लिए बेहद अहम होता है। इस साल मानसून ने सभी पूर्वानुमानों को पीछे छोड़ते हुए 19 मई को ही केरल में दस्तक दे दी है। यह वर्ष 2009 के बाद अब तक का सबसे जल्दी मानसून आगमन माना जा रहा है।
आईएमडी ने की पुष्टि
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रविवार को पुष्टि की कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल के तट पर समय से काफी पहले पहुंचकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया है। आमतौर पर मानसून केरल में 1 जून के आसपास आता है, लेकिन इस बार यह लगभग 13 दिन पहले आ गया।
जलवायु परिवर्तन का असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के इस जल्दी आगमन के पीछे जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी एक कारण हो सकता है। हालांकि, इसके पीछे स्थानीय मौसम परिस्थितियाँ जैसे अरब सागर का गर्म होना, दक्षिण-पश्चिमी हवाओं की गति और नमी का उच्च स्तर भी अहम भूमिका निभाते हैं।
क्या होगा असर?
जल्दी मानसून आने से दक्षिण भारत के किसानों को फसल की बुवाई के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, जिससे कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही जलाशयों और भूजल स्तर में भी सुधार होने की संभावना है। हालांकि, मानसून की अनियमितता कभी-कभी अत्यधिक वर्षा और बाढ़ जैसी आपदाएं भी ला सकती है, इसलिए राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को तैयार रहना होगा।
अन्य राज्यों में कब पहुंचेगा मानसून?
IMD के अनुसार, अब मानसून तेजी से उत्तर की ओर बढ़ेगा और अगले कुछ दिनों में तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी इसकी दस्तक हो सकती है। उत्तर भारत में मानसून जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के पहले हफ्ते में पहुंचने की संभावना है।
मौसम विभाग की भविष्यवाणी
IMD ने यह भी बताया कि इस साल मानसून सामान्य रहने की संभावना है, यानी देश के अधिकांश हिस्सों में औसत या उससे अधिक वर्षा हो सकती है। यह खबर किसानों और जल संसाधन प्रबंधन के लिए एक राहत की खबर है।