नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा हाल ही में किए गए ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय के लिए 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पूरक बजट के माध्यम से स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा. इस अतिरिक्त आवंटन का उद्देश्य सशस्त्र बलों की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करना, आवश्यक हथियारों और गोला-बारूद की खरीद को तेज करना, और रक्षा अनुसंधान व विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देना है.
ऑपरेशन सिंदूर, जिसे भारत ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के जवाब में शुरू किया था, ने भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत और सामरिक क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया. इस ऑपरेशन में नौ आतंकी शिविरों पर सटीक हवाई हमले किए गए, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ. सूत्रों का कहना है कि इस ऑपरेशन की सफलता ने रक्षा क्षेत्र में निवेश की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है, विशेष रूप से आधुनिक हथियार प्रणालियों, उन्नत तकनीक, और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए.
इस प्रस्तावित 50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन के साथ, रक्षा बजट 7 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है, जो 2025-26 के लिए पहले से आवंटित 6.81 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है. इस राशि का एक बड़ा हिस्सा नई तकनीकों के विकास, हथियारों और गोला-बारूद की खरीद, और सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर खर्च किया जाएगा. विशेष रूप से, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों जैसे आकाश मिसाइल और अन्य उन्नत हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा. इसके अलावा, ड्रोन, मिसाइल रक्षा प्रणालियों, और साइबर युद्ध क्षमताओं जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी.
सूत्रों ने यह भी बताया कि इस अतिरिक्त बजट का एक हिस्सा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को आवंटित किया जाएगा, ताकि नई तकनीकों के विकास में तेजी लाई जा सके. डीआरडीओ को पहले ही 2025-26 के लिए 26,817 करोड़ रुपये का बजट मिला है, और इस अतिरिक्त राशि से स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी को और मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विकास-सह-उत्पादन भागीदार मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता हो चुका है. फिर भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया भाषण में स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में कोई ढील नहीं देगा और देश की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा. इस संदर्भ में, रक्षा बजट में इस वृद्धि को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार करेगा.
रक्षा मंत्रालय ने 2025-26 को 'सुधारों का वर्ष' घोषित किया है, जिसका लक्ष्य सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार करना है. इस अतिरिक्त बजट से न केवल सैन्य क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा, बल्कि स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जो भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा.