नई दिल्ली: भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबी) का पुनर्गठन करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस पुनर्गठन के तहत पूर्व रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) प्रमुख आलोक जोशी को बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल थे।
नए बोर्ड में सैन्य सेवाओं से तीन सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इनमें पूर्व पश्चिमी एयर कमांडर एयर मार्शल पीएम सिन्हा, पूर्व दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह और रियर एडमिरल मोंटी खन्ना शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से सेवानिवृत्त राजीव रंजन वर्मा और मनमोहन सिंह, साथ ही भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) से सेवानिवृत्त वेंकटेश वर्मा इस सात सदस्यीय बोर्ड का हिस्सा हैं। यह पुनर्गठन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करने और सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना, अटारी-वाघा सीमा बंद करना, पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित करना और इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास बंद करना शामिल है। इन कदमों ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। पाकिस्तानी सूचना मंत्री अताउल्लाह तारार ने दावा किया कि उनके पास "विश्वसनीय जानकारी" है कि भारत अगले 24 से 36 घंटों में सैन्य हमला कर सकता है। इस बीच, पाकिस्तानी सेना ने कठुआ के प्रग्याल इलाके में अपनी कई चौकियां खाली कर दी हैं और आतंकियों को पीओके के लॉन्च पैड से सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार की बैठक में भारतीय सेनाओं को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए "पूरा ऑपरेशनल आजादी" दी और कहा कि कार्रवाई का समय, तरीका और लक्ष्य सेना खुद तय करेगी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी अहम भूमिका निभाई, जो पहले भी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट हवाई हमले जैसी कार्रवाइयों की रणनीति तैयार कर चुके हैं।
एनएसएबी का पुनर्गठन और आलोक जोशी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान को घेरना शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने इस हमले में पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया। ब्रिटेन ने भी भारत को हमले के दोषियों को सजा दिलाने के लिए "पूरा समर्थन" देने का वादा किया है। आलोक जोशी, जो 2012 से 2014 तक रॉ प्रमुख रह चुके हैं, अपनी खुफिया विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं। उनकी नियुक्ति से बोर्ड को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
यह पुनर्गठन भारत की सुरक्षा नीति में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का हिस्सा है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।