नई दिल्ली: सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन इस बार बाजार का रुख बदलता नजर आ रहा है. अप्रैल से जून 2026 के बीच भारतीयों ने 50 टन (50,000 किलो) पुराना सोना बेच दिया है. कीमतों में संभावित गिरावट के डर ने लोगों को अपना घरेलू सोना बेचने के लिए मजबूर कर दिया है.
क्यों बढ़ी बिकवाली?
ज्वेलरी बाजार पर असर
ज्वेलर्स के अनुसार, पुराने गहनों की बिक्री और एक्सचेंज में जबरदस्त उछाल आया है. कई जगहों पर यह लेन-देन 50-60% तक बढ़ गया है. लोग नए गहने खरीदने की बजाय पुराने गहनों को बेचकर नकद जुटा रहे हैं.
अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव?
हालांकि, विशेषज्ञों में इस बात को लेकर मतभेद है कि क्या सोने की कीमतों में वाकई बड़ी गिरावट आएगी या यह अस्थायी उतार-चढ़ाव है. कुछ इसे सामान्य मुनाफावसूली मान रहे हैं, तो कुछ को आगे और गिरावट की आशंका है.
बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए फैसला लें. पुराना सोना बेचना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि का निवेश सोच-समझकर करें. यह ट्रेंड दर्शाता है कि सोने का पारंपरिक आकर्षण अब कीमत के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो रहा है.