Indigo aircraft hit by hailstorm: तारीख थी 21 मई 2025, वक्त करीब शाम 6 बजे, दिल्ली से उड़ान भरी इंडिगो की फ्लाइट को श्रीनगर पहुंचने में करीब 20 मिनट का समय लगने वाला था, तभी तेज आंधी और बारिश आती है, पत्थर की तरह आसमान से ओले गिरने लगते हैं, विमान में अनाउंसमेंट होती है, सभी यात्री सीट बेल्ट बांध लें, मौसम खराब है, पर हवा की रफ्तार इतनी तेज थी विमान एक बस की तरह हिल-डूल रहा था, विमान में रखा सामान गिरने लगा था, विमान का अगला हिस्सा जिसे नोज कोन कहते हैं, वो बुरी तरह टूट चुका था, ये खतरा इसलिए बड़ा था क्योंकि
यानि विमान को कंट्रोल करना मुश्किल था, इसीलिए कईयों ने ये सोच लिया था अब बचने की उम्मीद नहीं थी, लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे थे. तभी पायलट एक दिमाग लगाता है, एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचित करता है, हम खतरे में हैं, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करवानी होगी, यहां से परमिशन भी मिल जाती है, पर खतरा ये था कि विमान को नीचे लाएं कैसे, हवा की दिशा विपरीत थी, एक भी गलती का मतलब था विमान में बैठे 227 यात्रियों की जान को खतरा पहुंचाना, उधर यात्री अंदर ही चीख-पुकार मचा रहे थे. बचाओ-बचाओ की गुहार लगा रहे थे.
पूरे फ्लाइट का माहौल तनावभरा था, केबिन क्रू मेंबर्स बार-बार शांति बनाए रखने की अपील कर रहे थे, अगर बस या ट्रेन होती तो कूद भी जाते, संकट ये था 30 हजार फीट की ऊंचाई से इमरजेंसी गेट खुलवाकर बिना पैराशूट के कोई कूदे कैसे, पायलट आसपास समुद्र या सेफ लैंडिंग की जगह तलाशता है, पर ऐसा कुछ नजदीक में नहीं था, आखिर में वो एक भयानक दिमाग लगाता है
इंडिगो की फ्लाइट नंबर 6E 2142 का आगे का हिस्सा जिसे नोज कोन कहा जाता है, वो 30 हजार फीट की ऊंचाई पर ही ओलो की मार से टूट चुका था. कईयों ने ये समझ लिया था कि ये आखिरी फ्लाइट है, इसी फ्लाइट में ममता बनर्जी की पार्टी की सांसद सागरिका घोष और उनके 4 और नेता मौजूद थे, ये लोग श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात करने जा रहे थे, सागरिका घोष खुद कहती हैं
ओवैसी मकबूल नाम के यूजर ने लिखा मैं उसी फ्लाइट में था, विमान की सफल लैंडिंग हमारे लिए चमत्कार की तरह है. विमान विशेषज्ञ बताते हैं ऐसी स्थिति के लिए पायलट को पहले ही ट्रेंड किया जाता है, वो ऐसे हालात में PAN-PAN शब्द का इस्तेमाल करता है, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोल में बैठे ऑफिसर तुरंत उनकी मदद के लिए एयरपोर्ट के ग्राउंड स्टाफ को अलर्ट भेजते हैं, जहां विमान की लैंडिंग होनी होती है, वहां एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस की भारी मौजूदगी होती है, ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत मदद मिल सके, यहां भी श्रीनगर एयरपोर्ट पर जैसे ही पायलट ने अलर्ट दिया, पूरा एय़रपोर्ट स्टाफ एक्टिव हो गया, और 30 हजार फीट की ऊंचाई से धीरे-धीरे पायलट ने विमान को नीचे लाना शुरू किया, और आखिर में सफल लैंडिंग हुई, ऐसे पायलट को सैल्युट ही नहीं बल्कि इनाम भी बनता है, जो सरकार को देना चाहिए.