नई दिल्ली: शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तनावपूर्ण घटना घटी, जिसमें ईरान की सेना ने भारत से जुड़े कई व्यापारिक जहाजों को रोका और दो पर गोली चलाई. अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते विवाद के बीच यह मसला सामने आया. आइए इस पूरी घटना को सरल तरीके से समझते हैं...
ईरान ने कुछ समय पहले होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने की घोषणा की थी. यह रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. बंद होने के कारण कई जहाज अटके हुए थे. घोषणा के बाद कुछ जहाज आगे बढ़े, जिनमें भारत की ओर आ रहे 14 जहाज भी शामिल थे. लेकिन ईरान जल्द ही अपना फैसला बदल गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रखने की बात आने के बाद ईरान ने स्ट्रेट को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया. इसके साथ ही ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नावें समुद्र में उतरीं और गुजर रहे जहाजों को रोकने लगीं. 14 जहाजों के इस समूह को ईरानी गार्ड्स ने घेर लिया और वापस लौटने का आदेश दिया.
इसी दौरान दो जहाजों जग अर्णव और सन्मार हेराल्ड पर ईरानी गनबोट्स से गोलीबारी की गई. दोनों जहाज भारतीय झंडे वाले थे. गोलीबारी बिना किसी पहले चेतावनी के हुई. एक जहाज पर गोली लगने से उसकी खिड़कियों के शीशे टूट गए. गोलीबारी के बाद दोनों जहाजों को अपनी राह बदलनी पड़ी और वे वापस लौट आए.
इनमें से एक सुपरटैंकर में कच्चा तेल लदा था, जबकि दूसरे में यूरिया (खाद) था. कुल 14 जहाजों में से 13 को वापस मुड़ना पड़ा, लेकिन एक जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज पार कर गया. उसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम का कच्चा तेल था और अब वह भारत की ओर बढ़ रहा है. 6 टैंकरों में कच्चा तेल, 3 जहाजों में एलपीजी (गैस), 4 में खाद के कंटेनर और बाकी बल्क कैरियर में अन्य सामान था.
इन 14 जहाजों में से 7 पर भारत का झंडा लगा था, 4 पर लाइबेरिया का, 2 पर मार्शल आइलैंड्स का और एक पर वियतनाम का.
घटना केशम और लराक द्वीप के बीच हुई. गोलीबारी के बाद 13 जहाज लराक आइलैंड के पास रुक गए हैं और ईरानी नौसेना की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. भारत ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाया.
विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को दिल्ली बुलाया और गहरी चिंता जताई. विदेश सचिव ने बैठक में कहा कि भारत व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लेता है. भारत ने ईरान को याद दिलाया कि पहले भी ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने में मदद की थी. अब जल्द से जल्द होर्मुज स्ट्रेट से भारत आने वाले जहाजों को रास्ता देने की अपील की गई. ईरानी राजदूत ने भारत की बात अपने अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया.
यह घटना अमेरिका-ईरान तनाव का नतीजा लग रही है. दुनिया भर में तेल की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है. क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है. भारत सरकार इस पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है. यह पूरी कहानी विभिन्न समाचार स्रोतों और सरकारी सूत्रों पर आधारित है.