नई दिल्ली: हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अपनी सबसे उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) DF-41 सौंप दी है या उसकी तकनीक शेयर की है. यह खबर अगर सही साबित होती तो वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा सकता है, क्योंकि इस मिसाइस की रेंज 12,000 से 15,000 है और हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरती है.
DF-41 मिसाइल क्या है?
रूस-चीन और ईरान के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग के बीच कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि बीजिंग ईरान को DF-41 जैसी स्ट्रैटेजिक मिसाइल या उसकी तकनीक दे रहा है. यह "दुश्मन का दुश्मन दोस्त" वाली रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है, क्योंकि दोनों देश अमेरिका की घेरेबंदी और दबाव से परेशान हैं. कुछ वीडियो और पोस्ट्स में तो "500 DF-41 मिसाइलें ईरान पहुंच गईं" जैसे दावे भी हैं.
हालांकि CNN, The Hill, New York Times की हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन ईरान को MANPADS (कंधे से दागे जाने वाले एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम) और एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में मिसाइल फ्यूल प्रोडक्शन के लिए केमिकल्स और डुअल-यूज टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का जिक्र है, लेकिन DF-41 जैसी ICBM का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. अमेरिकी इंटेलिजेंस भी इन ट्रांसफर्स को लेकर चिंतित है, लेकिन यह मुख्य रूप से छोटी दूरी की एंटी-एयर और मिसाइल सपोर्ट तक सीमित दिख रहा है.
संभावित प्रभाव अगर दावा सही हुआ
विशेषज्ञों का मानना है कि DF-41 जैसी अत्याधुनिक स्ट्रैटेजिक मिसाइल का ट्रांसफर बेहद जोखिम भरा होगा और चीन शायद इतना बड़ा कदम अभी नहीं उठाएगा, क्योंकि इससे अमेरिका-चीन संबंध और बिगड़ सकते हैं. कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि अमेरिका के ब्लॉकेड के कारण चीन के पास इसका विकल्प था. वहीं ईरान पहले से ही अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता रखता है, लेकिन ICBM स्तर की टेक्नोलॉजी अभी उसके पास नहीं है.