तेहरान: ईरान (Iran) ने चेतावनी दी है कि अगर उसके अपने बंदरगाहों को खतरा पहुंचाया गया तो खाड़ी क्षेत्र के कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेंगे, जबकि अमेरिका सोमवार से ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर नाकेबंदी (American Blockade) लागू करने की तैयारी कर रहा है. यह चेतावनी अमेरिकी सेना द्वारा घोषित किए गए उस फैसले के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि वह ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने वाला है.
यह कदम पाकिस्तान में हुए युद्धविराम वार्ता के विफल होने के बाद तेहरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है. ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सबके लिए साझा होनी चाहिए. उन्होंने घोषणा की कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सबके लिए है या फिर किसी के लिए नहीं और क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि नाकेबंदी सोमवार को सुबह 10 बजे से लागू होगी और यह फारस की खाड़ी तथा ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी. हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी.
इस घोषणा से क्षेत्र में समुद्री आवाजाही पहले ही प्रभावित हो चुकी है. युद्धविराम के बाद आंशिक रूप से बहाल हुई हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है. युद्धविराम के बाद अब तक केवल 40 से थोड़े अधिक वाणिज्यिक जहाज गुजरे हैं, जबकि संघर्ष से पहले रोजाना 100-135 जहाज गुजरते थे.
व्हाइट हाउस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदेश पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि संयुक्त राज्य अमेरिका 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश या निकास करने वाले जहाजों पर नाकेबंदी लगाएगा. इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”
विफल अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद नाकेबंदी की आशंका
यह कदम पाकिस्तान में हुई उच्च-स्तरीय अमेरिका-ईरान वार्ता के बिना किसी समझौते के खत्म होने के बाद उठाया गया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम से संबंधित प्रतिबद्धताएं शामिल थीं. वहीं ईरान ने अमेरिका-इजराइल हमलों से हुए नुकसान का मुआवजा और अपने फ्रोजन एसेट्स की रिहाई की मांग की.
ईरानी अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी. संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने कहा कि अगर तुम लड़ोगे, तो हम भी लड़ेंगे. जबकि सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजई ने कहा कि ईरान के पास नाकेबंदी का मुकाबला करने के लिए बड़े अछूते लीवर अभी भी मौजूद हैं. रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी ईरान के नियंत्रण में है और गैर-सैन्य जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन सैन्य जहाजों को जबरदस्त जवाब मिल सकता है.
नाकेबंदी से ईरान पर दबाव बढ़ सकता है
यह नाकेबंदी ईरान पर दबाव बढ़ाने के इरादे से लगाई जा रही है, जिसने युद्ध शुरू होने के बाद लाखों बैरल तेल निर्यात किया है, जिसमें से अधिकांश संभवत “डार्क” ट्रांजिट के जरिए हुआ है. ट्रंप ईरान के हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को कमजोर करना भी चाहते हैं, जहाँ युद्ध से पहले विश्व के 20% तेल का परिवहन होता था. अमेरिकी नाकेबंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार और भी अस्थिर हो सकते हैं.
नाकेबंदी के व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है. घोषणा के बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. अमेरिकी क्रूड 8% बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 7% बढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया. यह बढ़ती तनाव ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी विवाद के बीच आया है, जिसमें 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले वर्तमान युद्धविराम के बाद क्या होगा, इसकी कोई स्पष्टता नहीं है.