अंकारा: तुर्की ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और 35 अन्य इजरायली अधिकारियों के खिलाफ एक बड़ा कानूनी कदम उठाया है. शुक्रवार को इस्तांबुल के मुख्य अभियोजक ने इनके लिए कुल 4,596 साल तक की जेल की सजा की मांग की. यह मामला अगस्त 2025 में गाजा की ओर जाने वाले ‘सुमुद’ फ्लोटिला को इजरायल द्वारा रोके जाने से जुड़ा है. तुर्की का आरोप है कि इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इस मानवीय मिशन को रोककर गैरकानूनी सैन्य कार्रवाई की.
अभियोजन पक्ष ने नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर, पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट समेत कुल 36 इजरायली नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इनमें नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, यातना और लूटपाट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.
तुर्की के न्याय मंत्री ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता बताया. बता दें कि तुर्की पहले भी नवंबर 2025 में इन इजरायली नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुका था. ‘सुमुद’ फ्लोटिला में कई देशों के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे, जिनमें पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग भी थीं. इजरायल ने फ्लोटिला के 400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में सभी को देश से बाहर कर दिया गया था.
इजरायली नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
इस तुर्की के कदम पर इजरायल की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन को सोशल मीडिया पर सीधे अपशब्द कहते हुए लिखा - ''एर्दोगन, क्या तुम अंग्रेजी समझते हो? भाड़ में जाओ.''
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एर्दोगन पर अपने ही कुर्द नागरिकों के खिलाफ नरसंहार करने का आरोप लगाया और कहा कि इजरायल ईरान और उसके समर्थित आतंकी समूहों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा. रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने एर्दोगन को ''कागजी शेर'' करार दिया. उन्होंने कहा कि एर्दोगन ईरान द्वारा तुर्की पर दागी गई मिसाइलों का भी जवाब देने में असमर्थ रहे. यह पूरा विवाद इजरायल-तुर्की के बीच बढ़ते तनाव को और उजागर करता है.